देश के रियल एस्टेट मार्केट में इस साल की पहली तिमाही (FY27 Q1) में घरों की कीमतों में **6%** का इजाफा हुआ है। खास बात यह है कि बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में यह बढ़ोतरी **8%** तक पहुंच गई। हालांकि, कुल बिक्री का मूल्य **9%** बढ़ा, लेकिन बेचे गए घरों की संख्या यानी वॉल्यूम में सिर्फ **3%** की मामूली बढ़ोतरी हुई। यह दिखाता है कि अब मार्केट प्रीमियम और महंगी प्रॉपर्टीज की ओर बढ़ रहा है।
रियल एस्टेट में बढ़ी मांग, पर कहां?
FY27 की पहली तिमाही में, भारत भर में आवासीय संपत्तियों की कीमतों में सालाना आधार पर 6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह वृद्धि यह बताती है कि रियल एस्टेट मार्केट फिलहाल घरों की बिक्री की मात्रा में भारी उछाल के बजाय संपत्ति के बढ़ते मूल्यों से प्रेरित है। इस अवधि में एक प्रमुख रुझान बिक्री मूल्य और बिक्री की मात्रा के बीच का अंतर रहा। जहां बिक्री के कुल मूल्य में 9% की वृद्धि हुई, वहीं बेची गई इकाइयों की वास्तविक संख्या - यानी बिक्री की मात्रा - में केवल 3% की मामूली वृद्धि हुई।
बेंगलुरु और हैदराबाद की तूफानी रफ्तार
बेंगलुरु और हैदराबाद सबसे तेजी से बढ़ते बाजार के रूप में उभरे हैं, दोनों शहरों में कीमतों में 8% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह प्रदर्शन अन्य प्रमुख क्षेत्रों से काफी बेहतर रहा, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में 3% की मूल्य वृद्धि और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में 1% की मामूली वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़े बताते हैं कि दक्षिणी बाजारों में मांग अधिक मजबूत बनी हुई है, जो संभवतः बुनियादी ढांचे के विकास और अच्छी कनेक्टिविटी वाली परियोजनाओं की निरंतर मांग से जुड़ी है।
प्रीमियम सेगमेंट का बढ़ता दबदबा
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रीमियम और लग्जरी हाउसिंग की ओर एक स्ट्रक्चरल शिफ्ट (संरचनात्मक बदलाव) आया है। खरीदार अब बेहतर सामाजिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे वाले स्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे डेवलपर्स को अधिक कीमत वसूलने का मौका मिल रहा है। इस ट्रेंड ने बिक्री मूल्य में वृद्धि का समर्थन किया है, भले ही बिक्री की मात्रा में वृद्धि धीमी रही हो। नतीजतन, मार्केट अपनी गति बनाए रखने के लिए प्रीमियम सेगमेंट पर बहुत अधिक निर्भर हो गया है।
निवेशकों के लिए खतरे की घंटी
हालांकि, इस वृद्धि के साथ कुछ ऐसे जोखिम भी जुड़े हैं जिन पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए। राष्ट्रीय स्तर पर, इसी अवधि में नई परियोजनाओं की लॉन्चिंग में 14% की गिरावट आई है। जहां यह कमी डेवलपर्स को आपूर्ति का प्रबंधन करने में मदद करती है, वहीं यह भविष्य की मांग के प्रति उनकी सतर्कता को भी दर्शाती है। बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में, जहां डेवलपर्स ने बड़ी मात्रा में परियोजनाएं लॉन्च की हैं, वहां बिना बिके इन्वेंट्री (unsold inventory) के बढ़ने का भी जोखिम है।
एक और चिंता का विषय ₹1 करोड़ से कम के हाउसिंग सेगमेंट में मांग की स्थिरता है। इस सेगमेंट में मांग तब और कम हो सकती है यदि आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टरों में हायरिंग या वर्कफोर्स रीस्ट्रक्चरिंग (कार्यबल पुनर्गठन) में कोई मंदी आती है, जो इन दक्षिणी शहरों में आवासीय मांग के प्रमुख चालक हैं। चूंकि मार्केट भारी रूप से प्रीमियम प्रॉपर्टीज की ओर झुक रहा है, इसलिए मिड-मार्केट या सामान्य रोजगार क्षेत्रों में खरीदार की भावना में कोई भी गिरावट समग्र अवशोषण दरों (absorption rates) को प्रभावित कर सकती है। भविष्य में, मार्केट के लिए प्रमुख कारक प्रीमियम सेगमेंट में मांग की स्थिरता और यह होगा कि डेवलपर्स मूल्य निर्धारण पर और दबाव डाले बिना अपनी इन्वेंट्री के स्तर को कैसे संतुलित करते हैं।
