भारत के सात बड़े शहरों में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी के दाम साल 2021 से अब तक **59%** बढ़ चुके हैं, जो कंस्ट्रक्शन लागत में हुई **34%** की बढ़ोतरी से कहीं ज्यादा है। इस तेजी के पीछे जमीन की कीमतों में आया उछाल और सप्लाई चेन में आई रुकावटें मुख्य कारण हैं।
भारत के प्रमुख शहरी रियल एस्टेट बाजार में साल 2021 से 2025 के बीच कीमतों में बेतहाशा वृद्धि देखी गई है। सात बड़े शहरों में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की वैल्यू ₹5,826 से बढ़कर ₹9,260 प्रति स्क्वायर फीट तक पहुंच गई है। इसके उलट, कंस्ट्रक्शन की लागत—जिसमें मटेरियल और लेबर शामिल हैं—सिर्फ 34% ही बढ़ी है।
क्यों बढ़ रही हैं प्रॉपर्टी की कीमतें?
यह 25% का अंतर साफ दिखाता है कि घरों की कीमतों में तेजी का मुख्य ड्राइवर कंस्ट्रक्शन कॉस्ट नहीं, बल्कि जमीन की कीमतें हैं। बड़े शहरी गलियारों में जमीन के दाम पिछले पांच वर्षों में 50% से 120% तक बढ़ गए हैं। जिन कंपनियों के पास पहले से सस्ता लैंड बैंक है, उनके लिए यह एसेट वैल्यू में बड़ी बढ़त है।
सप्लाई चेन और बढ़ती लागत का दबाव
वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल अस्थिरता ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिससे प्रोजेक्ट की लागत में 8% से 10% का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। स्टील (TMT बार्स) में 20% और लॉजिस्टिक्स व फ्यूल की कीमतों में 15% से 20% तक की वृद्धि ने बजट मैनेजमेंट को मुश्किल बना दिया है।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मार्जिन का दबाव है। जो प्रोजेक्ट्स महंगाई बढ़ने से पहले लॉन्च हुए थे, वहां मार्जिन काफी कम हो गए हैं क्योंकि यूनिट्स पहले ही फिक्स्ड रेट पर बिक चुकी थीं। इसके अलावा, 5.4 लाख घर 2026 तक पूरा होने के दबाव में हैं, जिससे डिलीवरी में देरी का खतरा बना हुआ है। बढ़ती कीमतों के कारण बजट और मिड-इनकम हाउसिंग की डिमांड कम होने का भी जोखिम है, जिस पर निवेशकों को बारीक नजर रखनी चाहिए।
