India Housing Market: बढ़ती इन्वेंटरी ने बढ़ाई डेवलपर्स की टेंशन, घर खरीदारों के लिए क्या हैं संकेत?

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Housing Market: बढ़ती इन्वेंटरी ने बढ़ाई डेवलपर्स की टेंशन, घर खरीदारों के लिए क्या हैं संकेत?

भारतीय रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी मार्केट में अनसोल्ड घरों की संख्या बढ़कर 6.1 क्वार्टर के स्तर पर पहुंच गई है। लग्जरी घरों की डिमांड तो बढ़ रही है, लेकिन अफोर्डेबल और मिड-रेंज हाउसिंग सेगमेंट में सुस्ती से डेवलपर्स की चुनौतियां बढ़ती दिख रही हैं।

भारत का रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट इस वक्त एक अजीब दौर से गुजर रहा है, जहाँ लग्जरी और अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट के बीच बड़ी खाई दिख रही है। प्रमुख शहरों में रेजिडेंशियल सेल्स में साल-दर-साल आधार पर 3% की मामूली बढ़त तो देखी गई है, लेकिन समस्या 'अनसोल्ड इन्वेंटरी' की है। डेवलपर्स बाजार में जितनी तेजी से नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च कर रहे हैं, उस रफ्तार में घर बिक नहीं रहे हैं। इसी वजह से 'क्वार्टर्स टू सेल' का आंकड़ा पिछले साल के 5.8 से बढ़कर 6.1 हो गया है।

लग्जरी पर फोकस, अफोर्डेबल में सुस्ती

मार्केट का पूरा जोर अब प्रीमियम सेगमेंट पर है। ₹1 करोड़ से ज्यादा कीमत वाले घरों की बिक्री कुल सेल्स में करीब 55% हिस्सेदारी रखती है। ऐसे खरीदार ब्याज दरों या कीमतों में उतार-चढ़ाव से कम प्रभावित होते हैं, जिससे लग्जरी डेवलपर्स को सहारा मिला है। इसके विपरीत, स्टील और सीमेंट जैसी निर्माण सामग्री की महंगी कीमतों के कारण अफोर्डेबल घरों की लागत बढ़ गई है, जिससे आम खरीदारों की पहुंच से ये घर दूर होते जा रहे हैं।

दिल्ली-NCR का हाल और रिस्क

दिल्ली-NCR जैसे क्षेत्रों में रिस्क अधिक है, जहां साल के पहले 9 महीनों में घरों की बिक्री में 11% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि प्रॉपर्टी की कीमतों में 12% का इजाफा हुआ है। डेवलपर्स यहां कीमतों को घटाने के बजाय उन्हें ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की रणनीति अपना रहे हैं, जो डिमांड कम होने पर भारी पड़ सकती है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

इन्वेस्टर्स के लिए सेल्स के आंकड़ों के अलावा यह देखना जरूरी है कि कंपनी का पोर्टफोलियो कैसा है। जो डेवलपर्स अफोर्डेबल हाउसिंग पर निर्भर हैं, उनके मार्जिन पर दबाव बढ़ना तय है। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ब्याज दरों पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि ऊंची दरें घर खरीदारों की अफोर्डेबिलिटी को प्रभावित कर सकती हैं और डेवलपर्स के लिए डेट मैनेजमेंट को और चुनौतीपूर्ण बना सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.