India Housing Market: रियल एस्टेट में कंसॉलिडेशन का दौर शुरू! 2025 में घटी बिक्री, घरों की कीमतों पर लगा ब्रेक

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Housing Market: रियल एस्टेट में कंसॉलिडेशन का दौर शुरू! 2025 में घटी बिक्री, घरों की कीमतों पर लगा ब्रेक
Overview

साल 2025 में भारतीय रियल एस्टेट मार्केट ने एक धीमी ग्रोथ फेज में एंट्री की है। घरों की कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार कम हुई है, वहीं सेल्स वॉल्यूम में **12%** की बड़ी गिरावट देखी गई है, जो 2022 के बाद सबसे निचला स्तर है। हालांकि, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर अपवाद रहे, जहाँ कीमतों में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

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साल 2025 में भारतीय रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट में काफी नरमी देखी गई। प्रॉपर्टी की कीमतों में जहां 2024 में 17% की जोरदार तेजी आई थी, वहीं 2025 में यह घटकर सिर्फ 6% रह गई। यह कंसॉलिडेशन का साफ संकेत था। इसके साथ ही, आवासीय बिक्री (residential sales) में 12% की सालाना गिरावट आई, जो साल 2022 के बाद सबसे कम 386,365 यूनिट्स पर आ गई। 2025 की आखिरी तिमाही में भी बिक्री में 10% की गिरावट दर्ज हुई।

खास शहरों में दिखी मिली-जुली तस्वीर

हालांकि, पूरे देश में एक जैसी तस्वीर नहीं थी। कुछ शहर इस मंदी से अछूते रहे। बेंगलुरु और हैदराबाद ने अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। बेंगलुरु में प्रॉपर्टी की कीमतों में 13% की बढ़ोतरी हुई, जो 2024 से मामूली ही सही, लेकिन ज्यादा है। इसकी वजह वहां बनी रहने वाली एंड-यूज़र डिमांड और मजबूत लोकल इकोनॉमी रही। हैदराबाद में भी कीमतों में 8% की उछाल देखी गई, जो पिछले साल से बेहतर था। वहीं, बड़े मेट्रो शहरों में नरमी ज्यादा दिखी। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में जहां 2024 में कीमतों में 18% की तेजी थी, वह 2025 में घटकर 4% रह गई। पुणे का मार्केट भी तेजी से ठंडा हुआ, जहां प्राइस ग्रोथ 16% से गिरकर सिर्फ 1% रह गई। दिल्ली-NCR, जिसने 2024 में 49% की जबरदस्त तेजी दिखाई थी, वहां भी ग्रोथ घटकर 6% हो गई। अहमदाबाद और कोलकाता में भी प्राइस ग्रोथ में नरमी आई, जबकि चेन्नई का मार्केट स्थिर रहा।

मंदी के पीछे की वजहें और डेवलपर्स की स्ट्रैटेजी

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस मंदी के पीछे कई वजहें हैं। 2024 में कीमतों में आई भारी उछाल के बाद, अब अफोर्डेबिलिटी (affordability) यानी खरीदने की क्षमता एक बड़ी चिंता बन गई है। खरीदारों का सेंटिमेंट भी थोड़ा सतर्क हो गया है। पहले के समय में बढ़े हुए इंटरेस्ट रेट्स (interest rates) और लगातार बनी हुई महंगाई (inflation) ने लोगों की परचेजिंग पावर को प्रभावित किया है।

इन हालात में, डेवलपर्स ने आक्रामक बिक्री के बजाय प्राइस इंटीग्रिटी (price integrity) और इन्वेंटरी मैनेजमेंट (inventory management) पर फोकस किया। Aurum PropTech के Onkar Shetye के मुताबिक, डेवलपर्स ने भविष्य के लिए एक स्टेबल प्राइसिंग बेस बनाने की कोशिश की, बिना ज्यादा डिस्काउंट दिए और सप्लाई को डिमांड के हिसाब से ही बढ़ाया। यह उन पिछले सालों से बिल्कुल अलग था, जब कम इंटरेस्ट रेट्स और मजबूत इकोनॉमिक सपोर्ट के चलते कीमतों में तेजी से इजाफा होता था। 2025 में नई सप्लाई (new supply) में भी 6% की कमी आई, जो 2021 के बाद सबसे निचला स्तर है, इससे डेवलपर्स की सावधानी साफ झलकती है।

मार्केट का भविष्य और एनालिस्ट्स का नज़रिया

फिलहाल के हालात को देखते हुए, आने वाले समय में कीमतों में धीमी बढ़ोतरी और बिक्री की वॉल्यूम स्थिर रहने की उम्मीद है। ऐसे हाउसिंग सेगमेंट में अनसोल्ड इन्वेंटरी (unsold inventory) ज्यादा देखी गई, जहां प्रॉपर्टी की कीमत ज्यादा थी, जिसका मतलब है कि प्रीमियम प्रॉपर्टीज के लिए खरीददारों के फैसले लेने में ज्यादा समय लग रहा है।

एनालिस्ट्स का अनुमान है कि 2026 में कीमतें स्टेबल रहेंगी, और ग्रोथ काफी हद तक सेक्टर-स्पेसिफिक और लोकल इकोनॉमिक फंडामेंटल्स पर निर्भर करेगी, न कि किसी बड़े बूम पर। 2025 में बिक्री घटने के बावजूद कीमतों का स्टेबल रहना, यह दिखाता है कि मार्केट धीरे-धीरे सप्लाई-डिमांड के एक बैलेंस्ड इक्विलिब्रियम की ओर बढ़ रहा है। भारत की 2025 की ओवरऑल इकोनॉमिक ग्रोथ और महंगाई के आंकड़े भी बताते हैं कि भविष्य में एक कंट्रोल्ड एक्सपेंशन दिखेगा, जो आमतौर पर स्पेकुलेटिव (speculative) नहीं, बल्कि स्टेबल हाउसिंग डिमांड को सपोर्ट करता है। 2025 में रियल एस्टेट डेवलपर्स के स्टॉक्स ने भी इस सतर्क माहौल को दिखाया, जिसमें कई लार्ज-कैप डेवलपर्स ने समझदारी भरे फाइनेंशियल मैनेजमेंट से अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि छोटे प्लेयर्स को लिक्विडिटी (liquidity) की चुनौती का सामना करना पड़ा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.