भारत में सितंबर तिमाही के दौरान रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की डिमांड में **8.2%** की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। त्योहारी सीजन के कारण आई इस तेजी में बेंगलुरु और अहमदाबाद ने बाजी मारी है, लेकिन रियल एस्टेट मार्केट की यह रिकवरी अभी भी चुनिंदा शहरों तक सीमित है।
सितंबर तिमाही के दौरान देश भर में घरों की मांग में 8.2% का इजाफा देखने को मिला है। डेटा के अनुसार, त्योहारी सीजन ने खरीदारों के सेंटीमेंट को जबरदस्त बूस्ट दिया है। बेंगलुरु और अहमदाबाद इस दौड़ में सबसे आगे रहे, जहां डिमांड में क्रमशः 14.2% और 13.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो अन्य बड़े महानगरों की तुलना में काफी अधिक है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
यह आंकड़े लिस्टेड रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए एक पॉजिटिव संकेत हैं। हाई प्रॉपर्टी प्राइसेज और महंगे कर्ज के बावजूद घर खरीदार मार्केट में निवेश कर रहे हैं। हालांकि, सेक्टर में रिकवरी एक जैसी नहीं है। जहां प्रमुख शहरों में तेजी बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर सप्लाई के स्तर में केवल 1.9% की मामूली बढ़ोतरी देखी गई है।
कीमतों का रुख
प्रॉपर्टी की कीमतों में देशभर में 1% की हल्की बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब है कि डेवलपर्स मुनाफे और बिक्री की संख्या के बीच सावधानी बरत रहे हैं। मुंबई और चेन्नई जैसे बाजारों में कीमतों में तेजी अन्य क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा रही है।
आने वाले समय की चुनौतियां
फिलहाल, प्रीमियम और मिड-सेगमेंट हाउसिंग यूनिट्स की तरफ खरीदारों का झुकाव ज्यादा है। लेकिन, सबसे बड़ी चिंता होम लोन की ब्याज दरों की बनी हुई है। मिडिल-इनकम वाले खरीदारों की अफोर्डेबिलिटी अब भी एक मुख्य मुद्दा है। आने वाली तिमाहियों में इन्वेंट्री क्लियरेंस, कंस्ट्रक्शन की बढ़ती लागत और प्रोजेक्ट्स की समय पर डिलीवरी ही सेक्टर की अगली चाल तय करेगी।
