भारत के होटल सेक्टर में साल 2026 की पहली छमाही में **$493 मिलियन** की जबरदस्त ट्रांजेक्शन दर्ज की गई है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग तीन गुना है। अब निवेशकों का फोकस बड़े शहरों से हटकर टियर-II और टियर-III शहरों की ओर बढ़ गया है, जहां कुल डील वॉल्यूम का **60%** हिस्सा आया है।
होटल सेक्टर में जोरदार तेजी
भारतीय हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। साल 2026 की पहली छमाही में प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन का आंकड़ा $493 मिलियन तक पहुंच गया है। इस शानदार ग्रोथ को देखते हुए JLL ने साल 2026 के लिए अपने ट्रांजेक्शन अनुमान को बढ़ाकर $1.1 बिलियन कर दिया है। यदि ऐसा होता है, तो यह साल 2025 की तुलना में 94% की बड़ी ग्रोथ होगी।
छोटे शहरों का बढ़ा आकर्षण
निवेशकों की रणनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब कैपिटल पारंपरिक महानगरों के बजाय टियर-II और टियर-III शहरों की ओर शिफ्ट हो रही है। देश भर में बढ़ती डोमेस्टिक टूरिज्म और बिजनेस यात्राओं की डिमांड के चलते निवेशक अब छोटे शहरों में लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर दांव लगा रहे हैं।
लक्ज़री प्रॉपर्टीज का बोलबाला
निवेशकों की पहली पसंद अभी भी प्रीमियम प्रॉपर्टीज बनी हुई हैं। कुल ट्रांजेक्शन वैल्यू में लक्ज़री एसेट्स की हिस्सेदारी 52% रही। वहीं, अपस्केल सेगमेंट ने 35% मार्केट पर कब्जा जमाया। यानी कुल डील्स का 87% हिस्सा लक्ज़री और प्रीमियम होटल्स का रहा, जो यह साबित करता है कि निवेशक ब्रांड और क्वालिटी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
वैश्विक रैंकिंग और चुनौतियां
भारत अब एशिया-पैसिफिक रीजन में होटल ट्रांजेक्शन एक्टिविटी के मामले में 5वें नंबर पर आ गया है। हालांकि, बाजार के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अच्छे एसेट्स की कमी सप्लाई को बाधित कर सकती है। साथ ही, ग्लोबल इकोनॉमिक हेडविंड्स, रेगुलेटरी जटिलताएं और मार्केट में संभावित अस्थिरता निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
