साल 2026 के मध्य में भारतीय रियल एस्टेट मार्केट में खरीदारों के लिए एक नया दौर शुरू हो गया है। दूसरी तिमाही (Q2) में प्रॉपर्टी की बिक्री में **6.1%** की गिरावट देखी गई है, जिससे नए लॉन्च और रीसेल घरों के बीच सही चुनाव को लेकर खरीदारों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
क्या हैं मार्केट के नए ट्रेंड्स?
भारतीय रियल एस्टेट बाजार में नरमी देखी जा रही है। बिक्री की मात्रा में साल-दर-साल 6.1% की गिरावट के बावजूद, प्रॉपर्टी की औसत कीमतें 1% तिमाही-दर-तिमाही बढ़ी हैं। यह स्थिति सप्लाई और खरीदारों की मांग के बीच एक अंतर को दर्शाती है।
नए प्रोजेक्ट्स या रीसेल: क्या है बेहतर?
इस माहौल में, नए प्रोजेक्ट या रीसेल प्रॉपर्टी में से किसी एक को चुनना और भी मुश्किल हो गया है। बढ़ती इन्वेंट्री को संभालने के लिए, कई बड़े शहरों में डेवलपर्स आक्रामक प्राइस कट और इंसेंटिव दे रहे हैं। इन ऑफर्स में फ्लेक्सिबल पेमेंट प्लान या रेट बाय-डाउन शामिल हो सकते हैं। हालांकि, नए प्रोजेक्ट्स में कंस्ट्रक्शन में देरी जैसे जोखिम होते हैं, जो शुरुआती कीमत से कहीं ज्यादा हो सकते हैं।
दूसरी ओर, रीसेल प्रॉपर्टी में तुरंत निरीक्षण का फायदा मिलता है। स्थापित इलाकों में, जहां सप्लाई अक्सर कम होती है, कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। रीसेल घरों में कंस्ट्रक्शन टाइमलाइन की अनिश्चितता नहीं होती, लेकिन इन्हें मॉडर्न सुविधाओं के लिए कुछ रेनोवेशन की जरूरत पड़ सकती है।
सस्टेनेबिलिटी प्रीमियम का असर
प्रॉपर्टी वैल्यूएशन को प्रभावित करने वाला एक नया फैक्टर सस्टेनेबल फीचर्स हैं। एनर्जी-एफिशिएंट सिस्टम वाले घर 6% से 10% तक ज्यादा प्रीमियम चार्ज कर रहे हैं। यह ग्रीन सर्टिफिकेशन वाले नए प्रोजेक्ट्स और एनर्जी-सेविंग अपग्रेड्स की कमी वाले पुराने रीसेल यूनिट्स के बीच लॉन्ग-टर्म वैल्यू की तुलना को जटिल बनाता है।
भविष्य का अनुमान
वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) में रेजिडेंशियल होम सेल्स का मूल्य ₹6.65 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, अफोर्डेबिलिटी का दबाव बढ़ रहा है, और भविष्य की मांग मॉर्टगेज रेट्स और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पॉलिसी पर निर्भर करेगी। खरीदारों को अपने माइक्रो-मार्केट में इन्वेंट्री लेवल पर नजर रखनी चाहिए। यदि मांग नरम रहती है, तो डेवलपर्स द्वारा इंसेंटिव देने का चलन बढ़ सकता है, जिससे नए और मौजूदा घरों के बीच वैल्यू गैप कम हो सकता है। दोनों सेगमेंट के लिए, RERA फाइलिंग (नए प्रोजेक्ट्स के लिए) और क्लियर टाइटल व टैक्स रिकॉर्ड (रीसेल होम के लिए) का वेरिफिकेशन करना वित्तीय जोखिम को मैनेज करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
