India First Index Fund: ₹25 अरब के REIT मार्केट में एंट्री, निवेशकों को मिलेगा रियल एस्टेट का तगड़ा एक्सपोजर!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India First Index Fund: ₹25 अरब के REIT मार्केट में एंट्री, निवेशकों को मिलेगा रियल एस्टेट का तगड़ा एक्सपोजर!

India First ने भारतीय निवेशकों के लिए एक नया इंडेक्स फंड (Index Fund) लॉन्च किया है, जो Nifty REITs & Realty Index को ट्रैक करेगा। इस फंड में **60%** लिस्टेड रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) और **40%** रियल एस्टेट कंपनियों को शामिल किया जाएगा। इस कदम से **$25 अरब** तक पहुंचने वाले भारतीय REITs मार्केट को भुनाने की तैयारी है।

रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट का नया दौर

India First Index Fund के लॉन्च के साथ ही भारतीय रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट के बाजार में एक नया मोड़ आने की उम्मीद है। यह नया फंड निवेशकों को कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश का एक स्ट्रक्चर्ड तरीका प्रदान करेगा। वर्तमान में, Nifty REITs & Realty Index में पांच लिस्टेड REITs को 60% का वेटेज और प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियों को 40% का वेटेज दिया गया है।

कमर्शियल रियल एस्टेट तक आसान पहुंच

REITs, यानी रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स, आय उत्पन्न करने वाली संपत्तियों जैसे ऑफिस स्पेस और डेटा सेंटर के मालिक होते हैं और उनका प्रबंधन करते हैं। वे रेंटल इनकम को डिविडेंड (Dividend) के रूप में शेयरधारकों में बांटते हैं। यह फंड निवेशकों को सीधे महंगी कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदने के झंझट के बिना, बड़े रियल एस्टेट एसेट्स में निवेश का मौका देगा। भारत में मौजूदा लिस्टेड REITs के लिए वेटेड एवरेज लीज एक्सपायरी (Weighted Average Lease Expiry) 6 से 8 साल के बीच है, जो कैश फ्लो में स्थिरता का संकेत देता है।

रेगुलेटरी बदलाव और मार्केट ग्रोथ

उद्योग के अनुमानों के अनुसार, भारतीय REITs मार्केट, जिसकी वर्तमान मार्केट कैप लगभग $19 अरब है, 2030 तक $25 अरब तक पहुंच सकता है। इस ग्रोथ को सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) द्वारा रेगुलेट किया जा रहा है। 1 जनवरी 2026 से REITs को 'इक्विटी रिलेटेड इंस्ट्रूमेंट्स' के रूप में री-क्लासिफाई किया गया है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब लाता है।

टैक्स स्ट्रक्चर और जोखिम

REITs मॉडल की एक खास बात यह है कि आय पर ट्रस्ट स्तर के बजाय सीधे निवेशक स्तर पर टैक्स लगता है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। ऐतिहासिक रूप से, डिस्ट्रीब्यूशन यील्ड 5% से 7% सालाना रही है। फंड का प्रदर्शन रेंटल ग्रोथ, प्रॉपर्टी वैल्यूएशन और किरायेदारों की वित्तीय स्थिति पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, रियल एस्टेट कंपनियों में 40% के एलोकेशन के कारण, फंड का प्रदर्शन प्रॉपर्टी मार्केट के साइक्लिकल नेचर, जैसे कि रेजिडेंशियल डिमांड और डेवलपर्स के डेट लेवल पर भी निर्भर करेगा। भविष्य में जैसे-जैसे और REITs लिस्ट होंगे, फंड मैनेजर REITs और रियलिटी स्टॉक्स के बीच एलोकेशन को एडजस्ट कर सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.