CBRE की रिपोर्ट: 2030 तक भारत में Experiential खर्च, Goods से आगे निकलेगा

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AuthorNeha Patil|Published at:
CBRE की रिपोर्ट: 2030 तक भारत में Experiential खर्च, Goods से आगे निकलेगा

भारत में यात्रा, होटल और डाइनिंग जैसे Experiential खर्चों में 2030 तक **10.3%** की CAGR से बढ़ोतरी का अनुमान है, जो फिजिकल गुड्स की **9.1%** की ग्रोथ से ज़्यादा है। CBRE की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 'लाइफस्टाइल होटल्स' इस ग्रोथ के बड़े इंजन साबित होंगे, खासकर Gen Z की इमर्सिव अनुभव की मांग के कारण। यह बदलाव निवेश के बदलते परिदृश्य को दिखाता है, क्योंकि हॉस्पिटैलिटी कंपनियां आधुनिक यात्रियों की पसंद को पूरा करने के लिए एसेट-लाइट कन्वर्जन की ओर बढ़ रही हैं।

क्या हुआ?

भारतीय उपभोक्ता खर्च में एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव आ रहा है। 2025 और 2030 के बीच, यात्रा, डाइनिंग और होटल स्टे जैसे Experiential खर्चों में फिजिकल गुड्स पर होने वाले खर्च से ज़्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद है। CBRE की नई रिपोर्ट, 'Gen Z Checks In: The Rise of the Lifestyle Hotel' के मुताबिक, Experiential मार्केट 10.3% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ेगा, जबकि फिजिकल गुड्स 9.1% CAGR से बढ़ेंगे। Experiential कैटेगरीज में, होटल अकोमोडेशन सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला सेगमेंट होगा, जिसकी अनुमानित एनुअल ग्रोथ रेट 10.6% है।

लाइफस्टाइल होटल्स की ओर बढ़ता रुझान

रिपोर्ट 'लाइफस्टाइल होटल्स' के उभार को इस ट्रेंड का मुख्य कारण बताती है। पारंपरिक होटलों या इंडिपेंडेंट बुटीक प्रॉपर्टीज के विपरीत, लाइफस्टाइल होटल्स बुटीक स्टे की यूनिक, डिजाइन-लेड और कल्चरली इमर्सिव विशेषताओं को बड़े होटल चेन्स के मजबूत ऑपरेशनल, डिस्ट्रीब्यूशन और लॉयल्टी इकोसिस्टम के साथ जोड़ते हैं। आज के यात्रियों के लिए, ये जगहें सिर्फ रुकने की जगहें नहीं, बल्कि ऐसे एन्वॉयरनमेंट हैं जो कम्युनिटी सोशल इंटरेक्शन, वेलनेस इंटीग्रेशन और डिजिटली शेयर करने लायक एस्थेटिक्स (aesthetics) प्रदान करते हैं।

निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?

यह ट्रेंड हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के बिजनेस मॉडल में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। इन प्रॉपर्टीज की मांग को पूरा करने के लिए, इंडस्ट्री नए और महंगे कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट शुरू करने के बजाय पुरानी, अनब्रांडेड प्रॉपर्टीज को कन्वर्ट करने को ज़्यादा तरजीह दे रही है। यह एसेट-लाइट कन्वर्जन स्ट्रेटेजी कंपनियों को ज़मीन और कंस्ट्रक्शन की बढ़ती लागत को मैनेज करने में मदद करती है, साथ ही अपने फुटप्रिंट का विस्तार भी करती है।

भारत के प्रमुख लिस्टेड होटल प्लेयर्स, जैसे Indian Hotels Company, EIH (Oberoi Group), और Chalet Hotels, पहले से ही इस बदलते परिदृश्य में सक्रिय हैं। फोकस सिर्फ रूम सप्लाई से हटकर एक डिस्टिंक्टिव अनुभव प्रदान करने पर आ गया है, जो युवा, टेक-सैवी जनरेशन की जरूरतों को पूरा करे। इस कदम से ब्रांड्स को पारंपरिक, रिजिड होटल फॉर्मेट्स की तुलना में अपने Revenue Per Available Room (RevPAR) को बेहतर बनाने और प्रीमियम प्राइसिंग बनाए रखने में मदद मिल रही है।

सेक्टर ट्रेंड्स और रीजनल डेप्थ

ऐतिहासिक रूप से, भारत में होटल डेवलपमेंट टॉप-टियर मेट्रो मार्केट्स में केंद्रित रहा है। हालांकि, Experiential की वर्तमान मांग रीजनल और टर्शियरी मार्केट्स में डेवलपमेंट को बढ़ावा दे रही है। जैसे-जैसे ट्रैवल कनेक्टिविटी सुधर रही है और डोमेस्टिक टूरिज्म बढ़ रहा है, होटल ऑपरेटर्स 30 करोड़ की मिडिल-क्लास कंज्यूमर बेस का एक बड़ा हिस्सा हासिल करने के लिए इन उभरते डेस्टिनेशन्स में विस्तार कर रहे हैं।

जोखिम और एग्जीक्यूशन चुनौतियाँ

जबकि डिमांड का आउटलुक पॉजिटिव है, इंडस्ट्री को व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी चुनौती टैलेंट एक्विजिशन है, क्योंकि हॉस्पिटैलिटी बिजनेस को ऐसे स्किल्ड प्रोफेशनल्स की ज़रूरत है जो ट्रेडिशनल ऑपरेशंस और लाइफस्टाइल होटल्स के लिए आवश्यक हाई-टच सर्विस दोनों को मैनेज कर सकें। इसके अलावा, एसेट-लाइट कन्वर्जन मॉडल भले ही एफिशिएंट हो, लेकिन कन्वर्टेड प्रॉपर्टीज में ब्रांड कंसिस्टेंसी सुनिश्चित करने के लिए हाई गवर्नेंस स्टैंडर्ड्स की ज़रूरत होती है। बढ़ती कंस्ट्रक्शन कॉस्ट और एक्सपीरियंस-लेड मार्केट में अंतर्निहित अस्थिरता - जो काफी हद तक डिस्क्रिशनरी खर्चों पर निर्भर करती है - ऐसे फैक्टर्स हैं जो प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर सकते हैं अगर इकोनॉमिक कंडीशंस में उतार-चढ़ाव आता है।

निवेशकों को आगे क्या देखना चाहिए?

आने वाली तिमाहियों में शेयरधारकों के लिए मुख्य मॉनिटरेबल्स में रीजनल प्रॉपर्टी एक्सपेंशन की गति, होटल चेन्स की नॉन-पीक सीजन में ऑक्युपेंसी लेवल्स बनाए रखने की क्षमता, और लाइफस्टाइल-ब्रांड कन्वर्जन की सफलता पर मैनेजमेंट की कमेंट्री शामिल है। यह ट्रैक करना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियां अपनी एसेट-लाइट ग्रोथ स्ट्रेटेजी को क्वालिटी सर्विस और ऑपरेशनल एफिशिएंसी की निरंतर आवश्यकता के साथ कैसे संतुलित करती हैं, जो लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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