भारत का दबदबा: APAC ऑफिस मार्केट में टॉप पर
आने वाले समय में, खास तौर पर 2026 तक, भारत एशिया पैसिफिक (APAC) रीजन में नए ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की सप्लाई में सबसे बड़ा खिलाड़ी बनने जा रहा है। अनुमान है कि भारत इस दौरान APAC की कुल 61.3 मिलियन वर्ग फुट की नई सप्लाई में से करीब 24.5 मिलियन वर्ग फुट यानी लगभग 40% हिस्सेदारी रखेगा। इससे साफ है कि इंडिया रीजनल वर्कस्पेस मार्केट के लिए एक मजबूत ग्रोथ इंजन बनकर उभरेगा।
शहरों की बात करें तो, Bengaluru में सबसे ज्यादा 12.1 मिलियन वर्ग फुट की सप्लाई होने की उम्मीद है, जिसके बाद शंघाई (10 मिलियन वर्ग फुट) और दिल्ली-एनसीआर (7.1 मिलियन वर्ग फुट) का नंबर आएगा। साफ है, Bengaluru APAC में नई सप्लाई के मामले में लिस्ट में सबसे ऊपर होगा। ये नंबर्स दिखाते हैं कि भारत और चीन (जो कुल रीजनल सप्लाई का 75% से ज्यादा हिस्सा अकेले रखते हैं) हाई-ग्रोथ मार्केट्स पर खास ध्यान दे रहे हैं।
डिमांड के पीछे की वजह और 'क्वालिटी' की तलाश
भारत के ऑफिस मार्केट में यह तेजी कई मजबूत स्ट्रक्चरल डिमांड फैक्टर्स की वजह से आ रही है। इसमें सबसे बड़ी वजह ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) हैं। खासकर Bengaluru में, मल्टीनेशनल कंपनियाँ अपने इंजीनियरिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और AI-संचालित ऑपरेशंस को बढ़ा रही हैं। इसके अलावा, BFSI, कंसल्टिंग फर्म्स और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ऑपरेटर्स की डिमांड भी दिल्ली-एनसीआर और मुंबई जैसे शहरों में लगातार बनी हुई है।
इस लगातार बनी रहने वाली ऑक्यूपायर डिमांड, भारत के प्राइम मार्केट्स में सीमित सप्लाई और ग्लोबल 'फ्लाईट-टू-क्वालिटी' (यानी अच्छी क्वालिटी वाले ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग) के ट्रेंड को देखते हुए, किराए (rents) में अच्छी बढ़ोतरी देखने की उम्मीद है। इसका एक उदाहरण मुंबई का बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) है, जिसने 2025 में APAC में सबसे ज्यादा रेंटल ग्रोथ (23.1% ईयर-ऑन-ईयर) दर्ज की थी और 2026 में भी इसके 12.5% बढ़ने का अनुमान है।,
नाइट फ्रैंक (Knight Frank) का अनुमान है कि 2026 में भारतीय ऑफिस रेंट्स 7-10% तक बढ़ सकते हैं, जो रीजन के कई दूसरे देशों से काफी ज्यादा है। जबकि APAC के कुछ दूसरे मार्केट्स में ओवरसप्लाई का खतरा मंडरा रहा है, भारत में मजबूत लीजिंग मोमेंटम और बेहतर हो रही एसेट क्वालिटी यह बताती है कि यहां नई सप्लाई को आसानी से खपाया जा सकेगा। साथ ही, सस्टेनेबिलिटी (पर्यावरण अनुकूलता) पर भी खास जोर दिया जा रहा है, और आने वाली 80% से ज्यादा सप्लाई ग्रीन-सर्टिफाइड होने की उम्मीद है।
कॉम्पिटिटर मार्केट और मैक्रो इकोनॉमिक मजबूती
जहां APAC ऑफिस सप्लाई अपने पीक पर पहुंचने वाली है, वहीं टोक्यो, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख CBDs जैसे डेवलप्ड मार्केट्स में सप्लाई सीमित रहने का अनुमान है, जो वहां किराए को सपोर्ट करेगा। इसके विपरीत, ग्रेटर चाइना के ऑफिस मार्केट में H1 2025 तक बढ़ती वेकेंसी रेट और धीमी डिमांड के कारण दबाव बना रह सकता है।
हालांकि, ग्लोबल मैक्रो इकोनॉमिक एडजस्टमेंट और जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच भारत की ग्रोथ स्टोरी लगातार चमक रही है। ऑक्यूपायर्स भारत को मल्टी-फंक्शनल ग्रोथ के लिए एक स्केलेबल, टैलेंट-रिच डेस्टिनेशन के तौर पर देख रहे हैं, और इसकी कॉस्ट-कॉम्पिटिटिवनेस (लागत-प्रतिस्पर्धा) और मजबूत फंडामेंटल्स को महत्व दे रहे हैं। कुल मिलाकर, इंडिया का ऑफिस मार्केट अपने स्केल, ग्रोथ, किफ़ायतीपन, मॉडर्न सप्लाई और मजबूत लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल्स का एक दुर्लभ संगम प्रस्तुत करता है।