India Commercial Real Estate: WFH का बढ़ा क्रेज और भू-राजनीतिक तनाव, भारत के रियल एस्टेट पर मंडराया संकट!

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Commercial Real Estate: WFH का बढ़ा क्रेज और भू-राजनीतिक तनाव, भारत के रियल एस्टेट पर मंडराया संकट!
Overview

भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर पर काम पर लौटने (Work-From-Home) के सरकारी सुझाव और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों का असर दिखने लगा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि अगले 3 से 6 महीनों में रेंटल यील्ड्स में **5-6%** की गिरावट आ सकती है।

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सरकारी सलाह से रियल एस्टेट सेक्टर में चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बढ़ते वैश्विक तनावों के बीच वर्क-फ्रॉम-होम (WFH) मॉडल पर लौटने के सुझाव ने भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर में चिंता बढ़ा दी है। यह सलाह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊर्जा संबंधी चिंताओं के मद्देनजर आई है, जबकि बाजार अभी महामारी से पहले के ऑक्यूपेंसी लेवल पर लौटने की कोशिश कर ही रहा था।

रेंटल यील्ड्स में आ सकती है गिरावट

एनालिस्ट्स का अनुमान है कि अगले तीन से छह महीनों के भीतर कमर्शियल प्रॉपर्टी के रेंटल यील्ड्स में 5% से 6% तक की गिरावट आ सकती है। यह अनुमान इस बात पर निर्भर करेगा कि वैश्विक तनाव जारी रहता है या नहीं और कंपनियां रिमोट वर्क पॉलिसी बनाए रखती हैं या नहीं। डेवलपर्स और लीजिंग कंसल्टेंट्स का कहना है कि रिमोट या हाइब्रिड वर्क की ओर यह लंबा बदलाव डिमांड को कम कर सकता है, लीज रिन्यूअल को प्रभावित कर सकता है और किराए के मूल्यों को घटा सकता है।

शहरों में दिख रहा अंतर

हालांकि मुंबई जैसे प्रमुख कमर्शियल हब में पहले ही कमर्शियल प्रॉपर्टी डील्स में लगभग 40% की गिरावट और लीज एग्रीमेंट्स में कमी देखी गई है, लेकिन अन्य शहर मजबूती दिखा रहे हैं। हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और मल्टीनेशनल टेक्नोलॉजी फर्मों से मजबूत डिमांड के चलते अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं। कंसल्टेंट्स बताते हैं कि एक्सपैंड हो रहे GCCs इन दक्षिणी शहरों में डिमांड बढ़ा रहे हैं।

को-वर्किंग और विस्तार योजनाएं अनिश्चित

फाइनेंशियल सर्विसेज, कंसल्टिंग और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स वैश्विक हालात के स्थिर होने तक बड़े ऑफिस स्पेस की खरीदारी को टाल रहे हैं। इस सावधानी के चलते को-वर्किंग स्पेसेस (Co-working Spaces) की डिमांड में कमी और कंपनियों की विस्तार योजनाओं में देरी का खतरा भी है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.