इंफ्रा और हाउसिंग पर फोकस, विकास को मिलेगी तेजी
Union Budget 2026-27 में शहरी विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) पर सरकार का बड़ा फोकस है। इस बार का बजट शहरी क्षेत्रों में ग्रोथ और सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक कदम है।
शहरी आवास को मिलेगा ज़ोरदार बूस्ट
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY)–Urban के लिए ₹18,625 करोड़ और PMAY–Urban 2.0 के लिए ₹3,000 करोड़ का फंड आवंटित किया गया है। कुल मिलाकर ₹21,625 करोड़ की यह बड़ी रकम शहरी आवास प्रोजेक्ट्स (Projects) को तेज़ी से पूरा करने में मदद करेगी। इससे कंस्ट्रक्शन सेक्टर (Construction Sector) और लेबर मार्केट (Labor Market) को सीधा फायदा पहुंचेगा।
अर्बन चैलेंज फंड और रियल एस्टेट एसेट्स का नया इस्तेमाल
साथ ही, ₹10,000 करोड़ का एक 'अर्बन चैलेंज फंड' (Urban Challenge Fund) भी बनाया जाएगा, जो शहरी पुनर्विकास (Urban Redevelopment) और नई इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं (Projects) को फंड करेगा।
ट्रांसपोर्ट में क्रांति, वॉटरवेज पर बड़ा ज़ोर
सरकार Central Public Sector Enterprises (CPSEs) की रियल एस्टेट प्रॉपर्टीज़ (Real Estate Properties) को Real Estate Investment Trusts (REITs) के ज़रिए इस्तेमाल करने की योजना पर काम कर रही है, जिससे अटकी हुई प्रॉपर्टीज़ से कैपिटल (Capital) को निकालकर डेवलपमेंट (Development) में लगाया जाएगा।
ट्रांसपोर्ट सेक्टर (Transport Sector) में भी बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। ईस्ट में डांकुनी से वेस्ट में सूरत तक नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स (Dedicated Freight Corridors) बनाए जाएंगे, जिससे माल ढुलाई (Logistics) की लागत कम होगी और सामान की आवाजाही तेज़ होगी।
इसके अलावा, 20 नए नेशनल वॉटरवेज (National Waterways) को ऑपरेशनल (Operational) किया जाएगा, जो खनिज-समृद्ध क्षेत्रों, इंडस्ट्रियल सेंटर्स (Industrial Centers) और पोर्ट्स (Ports) को जोड़ेगा। कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम (Coastal Cargo Promotion Scheme) के तहत 2047 तक कोस्टल शिपिंग (Coastal Shipping) की हिस्सेदारी को 6% से बढ़ाकर 12% करने का लक्ष्य है।
सस्टेनेबिलिटी और शहरी सुविधाओं का विकास
बजट में Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation (AMRUT) के लिए ₹8,000 करोड़ का प्रावधान है। इससे शहरों में पानी की सप्लाई, सीवरेज (Sewage) और ड्रेनेज (Drainage) जैसी ज़रूरी सुविधाओं में सुधार होगा। ये कदम भारत के लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी (Long-term Sustainability) और कॉम्पिटिटिवनेस (Competitiveness) को मज़बूत करेंगे।