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IndiQube Spaces: ₹54 Cr डील से शेयर रॉकेट, पर कर्ज़ का साया?

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AuthorNeha Patil|Published at:
IndiQube Spaces: ₹54 Cr डील से शेयर रॉकेट, पर कर्ज़ का साया?
Overview

IndiQube Spaces Ltd के शेयरों में आज अच्छी खासी तेजी देखने को मिली। कंपनी को पुणे में एक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) क्लाइंट के साथ **₹54 करोड़** की पांच साल की वर्कस्पेस लीजिंग डील मिली है, जिसने निवेशकों की सेंटिमेंट को बूस्ट किया है।

₹54 करोड़ की डील से शेयर में दिखी तेजी

पुणे में एक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) क्लाइंट के साथ ₹54 करोड़ की पांच साल की वर्कस्पेस लीजिंग डील की घोषणा के बाद IndiQube Spaces Ltd के शेयरों में शानदार उछाल आया। इस डील से 1,140 सीटों की बुकिंग कन्फर्म हुई है, जिसने शुक्रवार को स्टॉक को ऊपर ले जाने में मदद की। इस पॉजिटिव खबर ने कंपनी की गहरी वित्तीय चुनौतियों और मार्केट की चिंताओं को कुछ समय के लिए ढक दिया।

सेक्टर की ग्रोथ के बीच स्टॉक में 17.4% की तेजी

शुक्रवार को ट्रेडिंग सेशन के दौरान शेयर में 17.4% तक की बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹145-₹148 तक पहुंच गया। 19 मार्च 2026 तक कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹3,100-₹3,300 करोड़ के आसपास था। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) ओवरसोल्ड कंडीशन का संकेत दे रहा था, जिससे और सुधार की उम्मीद जगी। यह तेजी इस बात के विपरीत है कि कंपनी इस साल अब तक गिरावट में रही है, जबकि भारतीय फ्लेक्स ऑफिस सेक्टर में ज़बरदस्त ग्रोथ देखी जा रही है। अनुमान है कि GCCs की डिमांड के चलते यह सेक्टर 2025 तक 100 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच सकता है। ब्रोकरेज फर्म JM Financial का अनुमान है कि IndiQube का रेवेन्यू FY26-28 के बीच 24% CAGR की दर से बढ़ सकता है। हालांकि, यह ग्रोथ ऐसे समय में हो रही है जब Nifty Realty Index पिछले एक साल में काफी गिरा है।

भारी कर्ज और घाटा ग्रोथ की संभावनाओं पर भारी

हाल की डील के बावजूद, IndiQube Spaces को बड़ी वित्तीय मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो 7.78 गुना के स्तर पर है, जो बहुत ज्यादा लेवरेज को दर्शाता है। इसके अलावा, कंपनी का अर्निंग्स पर शेयर (EPS) नेगेटिव है और पिछली तिमाही में ₹17.07 करोड़ का नेट लॉस हुआ है, जिससे इसका P/E रेशियो उपलब्ध नहीं है या नेगेटिव है। Q3 FY26 में रेवेन्यू 45% YoY बढ़कर ₹395 करोड़ रहा, जिससे ₹40 करोड़ का प्रॉफिट हुआ, लेकिन यह प्रदर्शन ऐतिहासिक रूप से स्थिर ऑपरेटिंग प्रॉफिट से मेल नहीं खाता। MarketsMojo ने 'Strong Sell' रेटिंग दी है, जिसमें लेवरेज और वैल्यूएशन को लेकर चिंता जताई गई है। स्टॉक लगातार 52-हफ्ते और ऑल-टाइम लो को छू रहा है, मार्च 2026 में यह ₹135.05 तक गिर गया था, जो Sensex से काफी खराब प्रदर्शन है। जुलाई 2025 में इसका IPO भी कमजोर डेब्यू साबित हुआ था।

विरोधाभासी संकेतों के बीच भविष्य अनिश्चित

IndiQube फ्लेक्स ऑफिस मार्केट में ऑपरेट कर रही है, जहां विश्लेषक कंपनी के रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान लगा रहे हैं। क्षमता बढ़ाने और GCC क्लाइंट्स को टारगेट करने की इसकी रणनीति आगे का रास्ता दिखाती है। हालांकि, कुछ बुलिश एनालिस्ट प्राइस टारगेट और कंपनी के भारी कर्ज, खराब प्रॉफिटेबिलिटी, और MarketsMojo की 'Strong Sell' रेटिंग के बीच एक बड़ा कंट्रास्ट है, जो अनिश्चितता पैदा करता है। कंपनी की भविष्य की स्टॉक परफॉर्मेंस के लिए अपनी काफी अधिक डेट को मैनेज करने और एक्सपेंशन प्लान्स को लागू करते हुए लगातार प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।

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