IndiQube के सितंबर तिमाही के नतीजे काफी दमदार रहे हैं। कंपनी का रेवेन्यू **35%** बढ़कर **₹471.9 करोड़** पर पहुंच गया है, वहीं नेट लॉस में **80%** की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
मुनाफे का गणित और अकाउंटिंग ट्विस्ट
IndiQube Spaces Limited ने 30 सितंबर, 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए मजबूत प्रदर्शन पेश किया है। कंपनी का रेवेन्यू 34.8% बढ़कर ₹471.9 करोड़ हो गया है, जबकि नेट लॉस गिरकर ₹5.86 करोड़ रह गया है, जो पिछले साल की तुलना में 80% कम है।
निवेशकों को यहाँ बारीकी समझने की जरूरत है। रिपोर्ट में दिख रहा घाटा मुख्य रूप से Ind AS 116 के अकाउंटिंग नियमों के कारण है, जिसमें लंबे समय के ऑफिस रेंट को डेट और एसेट माना जाता है। अगर हम IGAAP-आधारित आंकड़ों को देखें, तो कंपनी असल में मुनाफे में है। छमाही के लिए प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 66% बढ़कर ₹92 करोड़ तक पहुंच गया है, जो कंपनी के मजबूत कैश फ्लो को दर्शाता है।
GCC की डिमांड बनी ग्रोथ इंजन
कंपनी का ऑपरेशनल लेवल काफी मजबूत है। फिलहाल IndiQube के पास 138 सेंटर्स और 241,000 सीट्स हैं, जो कुल 10.86 मिलियन स्क्वायर फीट एरिया कवर करते हैं। इसकी सबसे बड़ी ताकत Global Capability Centres (GCCs) हैं, जो कंपनी के कुल रेवेन्यू का 54% हिस्सा अकेले संभाल रहे हैं। इसकी ऑक्यूपेंसी रेट 91% बनी हुई है, जो यह साबित करता है कि कंपनी की प्रॉपर्टीज पर किरायेदारों का भरोसा कायम है।
निवेशकों के लिए रिस्क फैक्टर्स
कंपनी तेजी से विस्तार कर रही है, लेकिन निवेशकों को कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए। IndiQube की 80% मौजूदगी सिर्फ दक्षिण भारत में है, जिसमें से 60% हिस्सा अकेले बेंगलुरु से आता है। इस भौगोलिक एकाग्रता (Geographic Concentration) का मतलब है कि अगर उस क्षेत्र के कमर्शियल रियल एस्टेट में सुस्ती आती है, तो कंपनी पर सीधा असर पड़ सकता है। इसके अलावा, एसेट-हेवी मॉडल होने की वजह से लंबे समय की रेंटल देनदारियों का दबाव हमेशा बना रहता है।
भविष्य में, निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी अपने नए सेंटर्स में ऑक्यूपेंसी लेवल को कैसे बनाए रखती है और टियर-II शहरों में अपना विस्तार कितनी कुशलता से करती है।
