Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) ने अब तक **1,40,000** से ज्यादा घर खरीदारों को उनके अटके हुए सपनों के घर दिलाने में मदद की है। बड़े डेवलपर्स अब इन प्रोजेक्ट्स को अपने हाथ में लेकर काम पूरा कर रहे हैं।
Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रहा है। साल 2018 में सरकार द्वारा घर खरीदारों को 'फाइनेंशियल क्रेडिटर्स' का दर्जा देने के बाद से कानूनी प्रक्रिया का पूरा फोकस कंपनियों को बंद करने के बजाय प्रोजेक्ट्स को पूरा करने पर शिफ्ट हो गया है। इस बदलाव ने होमबॉयर्स को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल कर दिया है।\n\n### बड़े डेवलपर्स की एंट्री\nमजबूत फाइनेंशियल स्थिति वाली कंपनियां अब अटके हुए प्रोजेक्ट्स में ग्रोथ की संभावनाएं देख रही हैं। Adani Realty और Macrotech Developers जैसी दिग्गज कंपनियां National Company Law Tribunal (NCLT) के जरिए उन प्रोजेक्ट्स को टेकओवर कर रही हैं, जिन्हें पुराने बिल्डर्स पूरा करने में नाकाम रहे। इससे न केवल कानूनी अड़चनें दूर हो रही हैं, बल्कि अटके हुए टैक्स और कांट्रेक्टर्स के बकाए का भुगतान कर कंस्ट्रक्शन की रफ्तार भी बढ़ाई जा रही है।\n\n### अभी भी हैं चुनौतियां\nप्रगति के बावजूद, अभी भी लगभग 1,10,000 घर खरीदार अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं। अदालती आदेश से लेकर चाबियां मिलने तक का समय अक्सर काफी लंबा होता है। साथ ही, बिल्डिंग मटेरियल जैसे स्टील, सीमेंट और लेबर की बढ़ती कीमतें एक बड़ा चैलेंज हैं। जो डेवलपर्स इन प्रोजेक्ट्स को ले रहे हैं, उन्हें आज की महंगाई के हिसाब से काम पूरा करना पड़ रहा है, जो मुनाफे और काम की गति पर दबाव डालता है।\n\n### आगे क्या देखना होगा?\nInsolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) अब पूरी कंपनी को फ्रीज करने के बजाय सिर्फ उस विशेष प्रोजेक्ट के इनसॉल्वेंसी पर ध्यान देने की तैयारी में है। निवेशकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि NCLT और स्थानीय रियल एस्टेट रेगुलेटर्स के बीच तालमेल कैसे बढ़ता है, ताकि प्रोजेक्ट्स को अप्रूवल जल्दी मिल सके और रुका हुआ काम तेजी से शुरू हो सके।
