कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहली बार हैदराबाद के Madhapur में ऑफिस का किराया बेंगलुरु के Outer Ring Road से भी ज्यादा हो गया है, जिसके पीछे Global Capability Centers (GCC) की भारी डिमांड है।
भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। पहली बार हैदराबाद का प्रमुख टेक हब 'Madhapur' रेंटल के मामले में बेंगलुरु के 'Outer Ring Road' (ORR) से आगे निकल गया है। यह बदलाव दर्शाता है कि कैसे हैदराबाद अब एक सस्ते डेस्टिनेशन से प्रीमियम बिजनेस हब में तब्दील हो चुका है।
आंकड़ों की जुबानी (Market Data)
सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, Madhapur कॉरिडोर में Grade A+ ऑफिस स्पेस का मासिक किराया ₹130 से ₹180 प्रति स्क्वायर फुट के बीच है। वहीं, बेंगलुरु का Outer Ring Road, जो अब तक हाई-एंड लीजिंग का बेंचमार्क रहा है, वहां किराया ₹85 से ₹150 के दायरे में है।
GCC का बड़ा दांव
इस तेजी की मुख्य वजह मल्टीनेशनल कंपनियों के Global Capability Centers (GCC) हैं। सिर्फ 2026 की पहली छमाही में हैदराबाद में GCC द्वारा लगभग 3.05 मिलियन स्क्वायर फुट ऑफिस स्पेस लिया गया। पूरे भारत में नए ऑफिस लीजिंग का करीब 43% हिस्सा अकेले GCC का रहा है।
बाजार का गणित और रिस्क
निवेशकों के लिए एक बड़ी सीख यह है कि बाजार हर जगह नहीं बढ़ रहा। Madhapur जैसे प्रीमियम इलाकों में वैकेंसी रेट गिरकर सिर्फ 3% से 5% रह गया है, जबकि अन्य इलाकों में यह 20% से 30% तक है।
हालांकि, इतनी तेजी के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव भी बढ़ा है। भारी ट्रैफिक और बढ़ती लागत आने वाले समय में कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। आने वाले 3 से 5 सालों में 8 से 12 मिलियन स्क्वायर फुट ऑफिस स्पेस की और जरूरत होगी, जिसके लिए शहर को अपनी बुनियादी सुविधाओं को तेजी से अपडेट करना होगा।
