सितंबर **2026** तिमाही में हैदराबाद में ऑफिस लीजिंग का आंकड़ा **4.21 मिलियन स्क्वायर फीट** पर पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले **49.5%** अधिक है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की बढ़ती मांग और DE Shaw व Wise जैसे बड़े सौदों के दम पर हैदराबाद तेजी से भारत का कमर्शियल हब बन रहा है।
भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट मैप पर हैदराबाद अब एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है। सितंबर 2026 की तिमाही में शहर ने 4.21 मिलियन स्क्वायर फीट की लीजिंग दर्ज की है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 49.5% की बड़ी उछाल है। इस दमदार प्रदर्शन के साथ ही हैदराबाद ने मुंबई और दिल्ली जैसे पारंपरिक वित्तीय केंद्रों को पीछे छोड़ दिया है।
बड़े सौदों से मिली रफ्तार
इस तेजी के पीछे ग्लोबल टेक और फाइनेंशियल कंपनियों का हाथ है। दो सबसे बड़े सौदों में DE Shaw ने 7,50,000 स्क्वायर फीट और Wise ने 5,00,000 स्क्वायर फीट जगह लीज पर ली है। ये सौदे देशभर में हुई बड़ी डील में शुमार हैं। इसके पीछे मुख्य वजह 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स' (GCCs) का विस्तार है, जो अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए टेक्नोलॉजी और सपोर्ट फंक्शन का काम करते हैं।
बेंगलुरु से मुकाबला
भले ही बेंगलुरु 5.2 मिलियन स्क्वायर फीट की लीजिंग के साथ अब भी नंबर-1 बना हुआ है (जिसमें HSBC की 1.2 मिलियन स्क्वायर फीट की बड़ी डील शामिल है), लेकिन हैदराबाद का फासला तेजी से कम हो रहा है। टैलेंट की उपलब्धता, कम ऑपरेशनल कॉस्ट और सरकारी सपोर्ट के चलते कंपनियां अब हैदराबाद को प्राथमिकता दे रही हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां
इन्वेस्टर्स को आने वाले समय में कुछ रिस्क फैक्टर पर नजर रखनी चाहिए। HITEC सिटी और गाचीबोवली जैसे इलाकों में तेजी से बढ़ते कॉर्पोरेट फुटप्रिंट के कारण ट्रैफिक और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है। यदि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेट डिमांड के साथ तालमेल नहीं बिठा पाया, तो भविष्य में ग्रोथ में बाधा आ सकती है। इसके अलावा, अगर भविष्य में कमर्शियल स्पेस की सप्लाई डिमांड से ज्यादा हो गई, तो रेंटल ट्रेंड्स पर असर पड़ सकता है, जिस पर मार्केट एक्सपर्ट्स की पैनी नजर है।
