RERA 2016 की धारा 14(3) के तहत, पजेशन के बाद 5 साल तक स्ट्रक्चरल खामियों को ठीक करना बिल्डर की कानूनी जिम्मेदारी है। यदि बिल्डर मरम्मत नहीं करता है, तो आप 30 दिन का नोटिस देकर RERA के जरिए हर्जाना मांग सकते हैं।
अपना आशियाना खरीदना जीवन की सबसे बड़ी फाइनेंशियल इनवेस्टमेंट होती है, लेकिन अक्सर पजेशन के बाद दीवार की दरारें, पाइप लीकेज या खराब वायरिंग जैसी समस्याएं निवेशकों का सिरदर्द बन जाती हैं। अगर आपको लगता है कि इसके पैसे आपको अपनी जेब से भरने होंगे, तो आप गलत हैं। कानूनन, बिल्डर को इन खामियों के लिए जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
पांच साल की कानूनी जिम्मेदारी
RERA 2016 की धारा 14(3) बिल्डर्स को पजेशन के बाद 5 वर्षों तक किसी भी स्ट्रक्चरल डिफेक्ट या खराब निर्माण कार्य के लिए जिम्मेदार बनाती है। यह कोई सुझाव नहीं बल्कि एक सख्त नियम है। कुछ राज्यों में तो यह वारंटी अवधि 10 साल तक भी हो सकती है, इसलिए अपने सेल एग्रीमेंट को जरूर चेक करें।
लीगल पेपर ट्रेल (Legal Paper Trail) है जरूरी
ज्यादातर लोग सिर्फ फोन पर शिकायत करते हैं, जो कानूनी लड़ाई में काम नहीं आती। एक मजबूत दावा पेश करने के लिए:
- बिल्डर को औपचारिक रूप से लिखित नोटिस भेजें।
- खामियों के फोटो या वीडियो सबूत के तौर पर लगाएं।
- हो सके तो किसी प्रोफेशनल इंजीनियर की 'स्नैगिंग रिपोर्ट' (Snagging Report) साथ जोड़ें।
30 दिन का नियम और शिकायत
नोटिस मिलने के बाद बिल्डर के पास मरम्मत के लिए सिर्फ 30 दिन का समय होता है। यदि वह इन 30 दिनों के भीतर काम पूरा नहीं करता, तो आप RERA एक्ट की धारा 31 के तहत संबंधित अथॉरिटी में केस फाइल कर सकते हैं। कोर्ट और कंज्यूमर कमीशंस ने हाल के समय में ऐसे मामलों में बिल्डर्स पर भारी जुर्माना लगाया है।
सावधानियां और चुनौतियां
अक्सर RWA (रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट की कुछ टिप्पणियों के अनुसार, दिवालियापन (Insolvency) के मामलों में RWA के पास हमेशा व्यक्तिगत खरीदारों का प्रतिनिधित्व करने का कानूनी अधिकार नहीं होता। इसलिए, किसी भी विवाद के समय अपने कागजी रिकॉर्ड्स को संभाल कर रखना ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।
