2026 में भारतीय रियल एस्टेट में घर खरीदारों के लिए एक बड़ा सवाल है: क्या तुरंत रहने के लिए तैयार घर खरीदें या निर्माणाधीन प्रॉपर्टी में निवेश करें? यह फैसला सिर्फ कीमत का नहीं, बल्कि आपकी आर्थिक क्षमता, टैक्स के फायदे और प्रोजेक्ट पूरा होने के जोखिम पर निर्भर करता है।
कीमत और टैक्स का खेल
तैयार घरों की कीमत अक्सर निर्माणाधीन यूनिट्स से 15% से 25% ज्यादा होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि तैयार घर एक फाइनल प्रोडक्ट है जिसमें कंस्ट्रक्शन का कोई जोखिम नहीं है। लेकिन, टैक्स का बड़ा फर्क है। अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर आमतौर पर 5% GST (या अफोर्डेबल हाउसिंग पर 1%) लगता है, जबकि तैयार घर, जिन्हें ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) मिल चुका है, GST से मुक्त होते हैं। ऐसे में, तैयार घर पर होने वाली टैक्स बचत थोड़ी राहत दे सकती है।
इंतजार का डबल बोझ
जो लोग अभी किराए पर रह रहे हैं, उनके लिए अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी की 'सस्ती' कीमत भ्रामक हो सकती है। खरीदारों को दोहरे बोझ का सामना करना पड़ता है - एक तरफ किराया देना, दूसरी तरफ होम लोन की EMI भरना। अगर प्रोजेक्ट में दो-तीन साल की देरी हुई, तो इस दौरान दिए गए किराए का कुल खर्च, सस्ते घर की बचत को खत्म कर सकता है। रेडी-टू-मूव घर इस डबल बोझ को खत्म करते हैं, जिससे खरीदार तुरंत शिफ्ट हो सकते हैं।
जोखिम और जरूरी जांच
रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) के आने से अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स का जोखिम कम हुआ है, पर खत्म नहीं हुआ। कंस्ट्रक्शन में देरी, मटेरियल की बढ़ती कीमतें या लेबर की कमी के कारण हो सकती है। इसलिए, अंडर-कंस्ट्रक्शन यूनिट चुनते समय डेवलपर का ट्रैक रिकॉर्ड, उसकी फाइनेंशियल हेल्थ और पिछली डिलीवरी परफॉर्मेंस बहुत महत्वपूर्ण है। खरीदारों को प्रोजेक्ट का RERA रजिस्ट्रेशन और डेवलपर की समय पर डिलीवरी का इतिहास जरूर चेक करना चाहिए।
तैयार घरों के लिए क्या देखें?
तैयार घर खरीदते समय भी पूरी जांच-पड़ताल जरूरी है। एक तैयार घर के लिए वैलिड ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) होना चाहिए। ये बताते हैं कि बिल्डिंग अप्रूव्ड प्लान के हिसाब से बनी है और रहने के लिए सुरक्षित है। OC के बिना, खरीदारों को बाद में लीगल, पानी या बिजली कनेक्शन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ये लीगल क्लियरेंस सुनिश्चित करना रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी खरीदने का सबसे अहम कदम है।
फैसला कैसे करें?
यह फैसला आपकी फाइनेंसियल प्लानिंग और टाइमलाइन पर निर्भर करता है। जो निवेशक कैपिटल एप्रिसिएशन चाहते हैं, वे अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी की ओर झुक सकते हैं। वहीं, जो तुरंत रहने के लिए घर चाहते हैं, वे देरी के अनिश्चितता से बचने के लिए रेडी-टू-मूव घर पसंद करेंगे। कोई भी एग्रीमेंट साइन करने से पहले, अपनी कैश फ्लो एनालिसिस करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आपका चुना हुआ रास्ता आपके बजट के अनुकूल है।
