प्रॉपर्टी मिलने में देरी से परेशान घर खरीदारों के लिए RERA Act 2016 एक बड़ा सहारा है। हाल के अदालती फैसलों ने प्रॉपर्टी मिलने में देरी होने पर ब्याज पाने के अधिकार को बरकरार रखा है। हालांकि, मुश्किल में फंसे बिल्डरों से पैसे की वसूली अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
RERA Act: घर खरीदारों के लिए मसीहा?
भारत में बहुत से घर खरीदारों के लिए, अपने नए अपार्टमेंट का इंतजार अक्सर तय समय से बहुत आगे खिंच जाता है। इस दौरान उन्हें किराए और लोन की EMI का दोहरा बोझ उठाना पड़ता है। लेकिन, रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम (RERA) 2016, खरीदारों को खास सुरक्षा प्रदान करता है। अगस्त 2026 तक, ये नियम खरीदारों को बिल्डरों को समय पर पजेशन (Possession) न देने के लिए जवाबदेह ठहराने का मुख्य जरिया बने हुए हैं।
RERA Act की धारा 18 क्या कहती है?
RERA Act की धारा 18 के तहत, बिल्डरों के लिए यह कानूनी तौर पर अनिवार्य है कि वे एग्रीमेंट फॉर सेल (Agreement for Sale) में बताई गई तारीख तक प्रॉपर्टी का पजेशन दें। अगर प्रोजेक्ट में देरी होती है, तो एक्ट खरीदारों को दो मुख्य रास्ते देता है:
- प्रोजेक्ट से पीछे हटना: खरीदार प्रोजेक्ट से अपना पैसा वापस ले सकते हैं। इसमें उन्हें चुकाई गई पूरी राशि के साथ ब्याज और हर्जाना भी मिलता है।
- प्रॉपर्टी रखना: अगर खरीदार प्रॉपर्टी अपने पास रखना चाहता है, तो वह पजेशन मिलने तक हर महीने की देरी के लिए ब्याज का दावा कर सकता है।
2026 का महत्वपूर्ण फैसला
अगस्त 2026 में बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) के एक फैसले ने इन अधिकारों को और मजबूत किया। कोर्ट ने साफ किया कि प्रॉपर्टी मिलने में देरी होने पर ब्याज पाने का अधिकार एक स्वतंत्र और अटूट वैधानिक अधिकार है। इसका मतलब है कि अगर बिल्डर के कॉन्ट्रैक्ट में ऐसे क्लॉज (Clause) भी हों जो देनदारी को सीमित करने या प्रोजेक्ट की समय-सीमा को स्वतः बढ़ाने की कोशिश करते हैं, तब भी खरीदार ब्याज का दावा कर सकता है।
बिल्डरों को मिली राहत, खरीदार के अधिकार बरकरार?
कानूनी सुरक्षा के बावजूद, कई प्रोजेक्ट्स में बाहरी कारणों से देरी हो रही है। जुलाई 2026 में, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs) ने RERA अधिकारियों को सलाह दी थी कि वे सप्लाई चेन (Supply Chain) में रुकावटों का सामना कर रहे योग्य प्रोजेक्ट्स के लिए चार महीने की एक्सटेंशन (Extension) पर विचार करें। इस कदम का मकसद बिल्डरों को निर्माण पूरा करने में मदद करना है। हालांकि, इससे खरीदार के मूल देरी की अवधि के लिए ब्याज मांगने के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता। खरीदारों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी स्थानीय RERA वेबसाइट पर प्रोजेक्ट-विशिष्ट अपडेट्स की जांच करें कि क्या उनके प्रोजेक्ट को ऐसी कोई एक्सटेंशन मिली है।
पैसों की वसूली: सबसे बड़ी चुनौती
इन कानूनी अधिकारों के बावजूद, असली चुनौती पैसों की वसूली में है। जब खरीदार RERA अथॉरिटी से रिफंड या ब्याज के लिए कोई फेवरेबल ऑर्डर (Favorable Order) प्राप्त कर लेता है, तो उसे लागू करना बिल्डर की वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है। अगर बिल्डर गंभीर कैश फ्लो (Cash Flow) की समस्या से जूझ रहा है, तो पैसों की वसूली एक लंबी और मुश्किल प्रक्रिया साबित हो सकती है। कई बार बिल्डर अनुपालन में देरी करने के लिए ऑर्डर्स के खिलाफ अपील करते हैं, जिससे घर खरीदारों की निराशा और बढ़ जाती है।
आगे क्या करें?
कोई भी कदम उठाने से पहले, खरीदारों को कानूनी सलाह के बिना EMI का भुगतान एकतरफा बंद करने जैसे निर्णय लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन हो सकता है। बिल्डर के साथ सभी कम्युनिकेशन (Communication) का रिकॉर्ड रखना, जिसमें देरी के संबंध में कोई भी लिखित नोटिस शामिल हो, किसी भी संभावित कानूनी प्रक्रिया के लिए जरूरी है। खरीदारों को सलाह दी जाती है कि वे औपचारिक, डॉक्यूमेंटेड कम्युनिकेशन को प्राथमिकता दें और विवाद शुरू करने से पहले कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लें। रिकवरी (Recovery) की समय-सीमा अक्सर केस की कानूनी मजबूती और प्रोजेक्ट डेवलपर की वित्तीय स्थिरता से जुड़ी होती है।
