घर खरीदने वालों के लिए अच्छी खबर! सिर्फ ब्याज दरें ही नहीं, बल्कि छिपे हुए शुल्कों और सही लोन अवधि (Loan Tenure) को समझकर आप अपने होम लोन के कुल बोझ को काफी कम कर सकते हैं। टैक्स छूट (Tax Deductions) और समय से पहले कुछ भुगतान (Early Repayments) करके आप लंबे समय में लाखों रुपये बचा सकते हैं।
होम लोन के जाल से कैसे निकलें?
घर खरीदना जीवन का सबसे बड़ा फाइनेंशियल फैसला होता है। होम लोन लेते समय अक्सर लोग सिर्फ ब्याज दर (Interest Rate) पर ही ध्यान देते हैं, लेकिन यह असल कीमत का एक छोटा सा हिस्सा है। 15-20 साल तक चलने वाले लोन में छिपी हुई फीस आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है।
ब्याज दर से परे, छिपे शुल्कों की जांच करें
बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों से लोन लेते समय, सिर्फ ब्याज दर ही नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग फीस, एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज, प्रॉपर्टी वैल्यूएशन कॉस्ट और लीगल डॉक्यूमेंटेशन फीस को भी कैलकुलेट करें। कई बार कम ब्याज दर वाला लोन ऊंची अपफ्रंट फीस के साथ आता है। लोन एग्रीमेंट साइन करने से पहले सभी शुल्कों की एक क्लियर लिस्ट मांगना जरूरी है। इसमें लोन के साथ बंडल किए गए इंश्योरेंस प्रीमियम को भी शामिल करना न भूलें।
अपनी क्षमता के अनुसार लोन लें और अवधि समझदारी से चुनें
फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स आपकी इनकम के आधार पर अधिकतम लोन राशि अप्रूव करते हैं, लेकिन हमेशा पूरी राशि लेना सही नहीं होता। ज्यादा लोन का मतलब है बड़ी EMI और कुल मिलाकर ज्यादा ब्याज का भुगतान। अपनी जरूरत का ठीक से आंकलन करें और डाउन पेमेंट बढ़ाकर लोन का बोझ कम करें।
लोन की अवधि (Tenure) एक नाजुक संतुलन है। लंबी अवधि EMI का बोझ कम करती है, लेकिन कुल ब्याज का भुगतान बढ़ा देती है। छोटी अवधि में EMI ज्यादा होती है, लेकिन कुल ब्याज की बचत काफी ज्यादा होती है। अपनी इनकम की स्थिरता और लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल्स के हिसाब से ही अवधि चुनें।
टैक्स छूट और प्रीपेमेंट का उठाएं फायदा
भारतीय टैक्स कानून होम लोन पर मिलने वाली खास छूट के जरिए आपकी लागत को कम करने में मदद करते हैं। इनकम टैक्स एक्ट के तहत, आप ब्याज और मूलधन (Principal) के भुगतान पर टैक्स छूट का क्लेम कर सकते हैं। इन प्रावधानों का ध्यान रखने से आप टैक्स बचाने में कामयाब होते हैं।
कुल ब्याज कम करने का एक और असरदार तरीका है पार्ट-प्रीपेमेंट। फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन में आप बिना किसी पेनल्टी के समय से पहले मूलधन का कुछ हिस्सा चुका सकते हैं। एनुअल बोनस या अचानक मिले पैसे से छोटे-छोटे प्रीपेमेंट करके आप लोन की अवधि को काफी कम कर सकते हैं। क्योंकि ब्याज घटते हुए मूलधन पर कैलकुलेट होता है, इसलिए इन शुरुआती भुगतानों का बड़ा असर होता है और आप लाखों रुपये बचा सकते हैं। अगला कदम यह जांचना है कि आपका बैंक बिना किसी एक्स्ट्रा कॉस्ट के प्रीपेमेंट की सुविधा देता है या नहीं।
