भारत में प्रॉपर्टी खरीदना एक बड़ा फाइनेंशियल फैसला है। कानूनी विवादों और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए निवेशकों को RERA रजिस्ट्रेशन, क्लियर लैंड टाइटल और कुल लागत की बारीकी से जांच करनी चाहिए। इन स्टेप्स से आप प्रोजेक्ट में देरी और छुपे हुए खर्चों के जोखिम को कम कर सकते हैं।
घर खरीदना किसी भी भारतीय परिवार के लिए सबसे बड़े फाइनेंशियल फैसलों में से एक होता है। ब्रोकर्स और विज्ञापनों में दी गई चमचमाती तस्वीरें और सुविधाओं के वादे अक्सर कानूनी और आर्थिक जोखिमों को छिपा लेते हैं। अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है कि आप बुकिंग अमाउंट देने से पहले एक स्ट्रक्चर्ड 'ड्यू डिलिजेंस' (Due Diligence) प्रोसेस फॉलो करें।
कानूनी और रेगुलेटरी जांच
घर खरीदारों के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच 'RERA' (Real Estate Regulation and Development Act) है। किसी भी प्रोजेक्ट में पैसा लगाने से पहले संबंधित स्टेट पोर्टल पर जाकर RERA रजिस्ट्रेशन जरूर चेक करें। इसके अलावा, जमीन के टाइटल की कम से कम 30 साल पुरानी चेन ट्रैक करना जरूरी है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जमीन किसी पुराने विवाद में नहीं फंसी है।
इसके अलावा, यह भी देखें कि डेवलपर के पास 'कमेंसमेंट सर्टिफिकेट' (CC) है या नहीं। यदि आप तैयार प्रोजेक्ट ले रहे हैं, तो 'ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट' (OC) की मांग करना अनिवार्य है। बिना OC वाली प्रॉपर्टी को स्थानीय अधिकारी अवैध मान सकते हैं, जिससे पानी, बिजली जैसे जरूरी कनेक्शन मिलने में दिक्कत आ सकती है।
असली कीमत को पहचानें (Total Cost of Acquisition)
अक्सर लोग केवल 'बेस प्राइस' (Base Price) देखकर फैसला ले लेते हैं, जबकि फाइनल कीमत काफी ज्यादा हो सकती है। GST, स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस और मेंटेनेंस डिपॉजिट जैसे खर्चों के अलावा कई बार 'फ्लोर-राइज प्रीमियम' और 'क्लब मेंबरशिप फीस' जैसे छुपे हुए चार्ज भी जोड़ दिए जाते हैं। अपना बजट तय करते समय इन सभी खर्चों को मिलाकर 'टोटल कॉस्ट' निकालें। साथ ही, 'सुपर बिल्ट-अप एरिया' के बजाय 'कार्पेट एरिया' (Carpet Area) पर फोकस करें, ताकि आपको पता रहे कि आप वास्तव में कितनी जगह के लिए पैसे चुका रहे हैं।
एग्रीमेंट के जरिए पूंजी की सुरक्षा
सेल्स टीम के मौखिक वादों की कोई कानूनी वैल्यू नहीं होती। RERA के नियमों के अनुसार, डेवलपर कुल कीमत के 10 प्रतिशत से ज्यादा रकम बतौर बुकिंग फीस नहीं ले सकता, जब तक कि एग्रीमेंट फॉर सेल साइन न हो जाए।
यह एग्रीमेंट ही सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें कार्पेट एरिया, डिलीवरी की समय सीमा और देरी होने पर डेवलपर पर लगने वाली पेनल्टी का जिक्र साफ-साफ होना चाहिए। किसी भी दस्तावेज पर साइन करने से पहले कैंसिलेशन और रिफंड पॉलिसी को ध्यान से पढ़ना न भूलें। हर ट्रांजैक्शन का लिखित रिकॉर्ड रखना भविष्य में कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए आपकी सबसे बड़ी ताकत होगी।
