Home Affordability 2026: RBI की ब्याज दर कटौती से कीमतों का असर बेअसर, खरीदारों को मिली राहत

REAL-ESTATE
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Home Affordability 2026: RBI की ब्याज दर कटौती से कीमतों का असर बेअसर, खरीदारों को मिली राहत

साल 2026 के पहले छह महीनों में, भारत के बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ने के बावजूद, घर खरीदने की क्षमता (Affordability) स्थिर बनी हुई है। इसकी मुख्य वजह है RBI की ब्याज दरों में कटौती, जिसने होम लोन की EMI को आम खरीदारों के लिए मैनेजेबल बनाए रखा है।

क्या हुआ?

साल 2026 के पहले हाफ में, भारत के प्रमुख शहरों में घरों की अफोर्डेबिलिटी (Affordability) यानी खरीदने की क्षमता मजबूत बनी रही। 8 सबसे बड़े मेट्रो शहरों में से 6 में, घर की EMI और हाउसहोल्ड इनकम का रेश्यो (Ratio) मैनेजेबल लेवल पर रहा। यह इसलिए संभव हो पाया क्योंकि फरवरी 2025 से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ब्याज दरों में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की है, जिसने प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों के असर को काफी हद तक कम कर दिया है।

शहरों का हाल

अहमदाबाद देश का सबसे अफोर्डेबल (Affordable) रियल एस्टेट मार्केट बनकर उभरा है, जहां EMI पर होने वाला मासिक खर्च परिवार की औसत आय का सिर्फ 23% है। कोलकाता और पुणे ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है, जहां अफोर्डेबिलिटी रेश्यो क्रमशः 25% और 28% दर्ज किया गया। इसका मतलब है कि इन शहरों में ज्यादातर लोग अपने बजट के अंदर रहकर घर खरीद सकते हैं। दूसरी ओर, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) सबसे कम अफोर्डेबल बना हुआ है, जहां रेश्यो 69% है। नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में भी अफोर्डेबिलिटी थोड़ी गिरी है, रेश्यो बढ़कर 67% हो गया है, जबकि बेंगलुरु में यह 35% पर है।

निवेशकों के लिए क्यों है अहम?

रियल एस्टेट में निवेश करने वालों के लिए, घरों की अफोर्डेबिलिटी डिमांड का एक बड़ा इंडिकेटर (Indicator) है। जब अफोर्डेबिलिटी स्थिर रहती है, तो इसका मतलब है कि घरों की बिक्री अच्छी रहने की उम्मीद है। वर्तमान ट्रेंड बताता है कि रियल एस्टेट सेक्टर को अच्छी फाइनेंसिंग कंडीशन (Financing Conditions) और स्थिर रोजगार का फायदा मिल रहा है। हालांकि, अहमदाबाद जैसे अफोर्डेबल शहरों और मुंबई-दिल्ली जैसे महंगे शहरों के बीच का अंतर यह भी दिखाता है कि डिमांड ग्रोथ अलग-अलग क्षेत्रों में काफी भिन्न हो सकती है।

कीमतों में बढ़ोतरी और मार्केट ट्रेंड

प्रॉपर्टी की कीमतें रुकी नहीं हैं। NCR में अफोर्डेबल घरों की कीमतें सालाना 6% से 18% तक बढ़ी हैं, जबकि MMR में यह 3% से 5% के बीच रही हैं। अन्य बड़े शहरों में 3% से 8% की मामूली बढ़ोतरी देखी गई। ऐतिहासिक रूप से, 2016 से 2021 के बीच अफोर्डेबिलिटी में काफी सुधार हुआ था, लेकिन 2022 में प्रॉपर्टी की कीमतों और ब्याज दरों में आई अस्थिरता ने दबाव बना दिया था। वर्तमान स्थिरता, सेंट्रल बैंक की मॉनेटरी ईजिंग (Monetary Easing) की ओर शिफ्ट होने के कारण आई है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

निवेशकों को RBI की भविष्य की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि रेपो रेट में कोई भी बदलाव सीधे होम लोन की लागत को प्रभावित करेगा और इससे अफोर्डेबिलिटी पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, MMR और NCR जैसे महंगे बाजारों में इन्वेंटरी लेवल (Inventory Levels) पर नजर रखना भी जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि कीमतों में बढ़ोतरी आय वृद्धि से आगे निकलती है या डेवलपर्स को बिक्री बनाए रखने के लिए कीमतों को कम करना होगा।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.