फ्रांस में रह रहीं एक भारतीय महिला ने पेरिस के पास अपने अपार्टमेंट के मालिकाना हक से जुड़े मासिक खर्चों का खुलासा किया है। EMI के ₹1.4 लाख के अलावा, उन्हें करीब ₹71,000 के अतिरिक्त शुल्क चुकाने पड़ रहे हैं। यह रिपोर्ट अंतर्राष्ट्रीय रियल एस्टेट में निवेश करने वालों के लिए एक ज़रूरी चेतावनी है।
अंतर्राष्ट्रीय रियल एस्टेट में निवेश करने वाले कई भारतीय निवेशक अक्सर प्रॉपर्टी की कीमत या मासिक EMI को ही सब कुछ मान लेते हैं। लेकिन, पेरिस के पास एक अपार्टमेंट के मालिक ने अपने मासिक खर्चों का जो ब्यौरा दिया है, वह 'टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप' को समझने का एक कड़वा सच सामने लाता है।
EMI के अलावा भी हैं बड़े खर्चे!
सिर्फ ₹1.4 लाख की मासिक EMI ही प्रॉपर्टी के मालिक होने का पूरा हिसाब नहीं है। फ्रांस में प्रॉपर्टी खरीदने वालों को लोन से जुड़े इंश्योरेंस, बिल्डिंग मेंटेनेंस चार्ज, प्रॉपर्टी टैक्स और बिजली-इंटरनेट जैसे यूटिलिटी बिलों पर भी हर महीने मोटा पैसा खर्च करना पड़ता है।
इस महिला के मामले में, ये सभी अतिरिक्त खर्चे मिलकर हर महीने करीब ₹71,000 तक पहुंच जाते हैं। यानी, आपकी EMI से लगभग 50% ज़्यादा! यह दिखाता है कि विदेशी संपत्ति में निवेश का असली फायदा या नुकसान समझने के लिए इन प्रशासनिक और कानूनी खर्चों को जोड़ना कितना ज़रूरी है।
छुपे हुए खर्चों को क्यों नज़रअंदाज़ न करें?
रियल एस्टेट में निवेश का असली रिटर्न (Net Return) अक्सर इन छोटे-छोटे लगने वाले खर्चों में ही चला जाता है। विकसित देशों में प्रॉपर्टी टैक्स और मेंटेनेंस फीस काफी ज़्यादा हो सकती है, और वे हर साल महंगाई के हिसाब से बढ़ते भी हैं। साथ ही, लोन और प्रॉपर्टी के इंश्योरेंस जैसे खर्चे तो अनिवार्य होते हैं।
अगर आप भी विदेश में प्रॉपर्टी खरीदने की सोच रहे हैं, तो लोकल प्रॉपर्टी टैक्स रेट, बिल्डिंग मैनेजमेंट की फीस और यूटिलिटी कॉस्ट में होने वाले उतार-चढ़ाव पर नज़र रखें। इन सभी कुल खर्चों को समझना इसलिए ज़रूरी है ताकि आपका प्रॉपर्टी निवेश एक अच्छा फैसला साबित हो, न कि अचानक आने वाले बड़े खर्चों का बोझ।
