हरियाणा में सीनियर होम्स के लिए बिल्डिंग नियमों में बड़ी ढील, डेवलपर्स की होगी चांदी!

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AuthorMehul Desai|Published at:
हरियाणा में सीनियर होम्स के लिए बिल्डिंग नियमों में बड़ी ढील, डेवलपर्स की होगी चांदी!
Overview

हरियाणा सरकार ने सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट्स के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब इन प्रोजेक्ट्स के लिए फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) **2.25** से बढ़ाकर **3.0** कर दिया गया है। ट्रांसफरबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) का उपयोग करके डेवलपर्स इस बढ़े हुए FAR का लाभ उठा सकेंगे, जिससे प्रॉपर्टी डेवलपर्स के लिए सीनियर होम्स बनाना और भी फायदेमंद हो जाएगा।

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नियमों में बदलाव और डेवलपर्स को राहत

हरियाणा सरकार ने सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट्स के लिए अपनी रिटायरमेंट हाउसिंग पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। अब इन प्रोजेक्ट्स के लिए फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) को 2.25 से बढ़ाकर 3.0 कर दिया गया है। डेवलपर्स इस उच्च FAR का लाभ ट्रांसफरबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) का उपयोग करके उठा सकते हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट्स की आर्थिक व्यवहार्यता (economic viability) को बढ़ाना है।

गुरग्राम और रियल एस्टेट पर असर

यह पॉलिसी खास तौर पर गुरग्राम जैसे हाई-एंड बाजारों के लिए फायदेमंद साबित होगी, जहां जमीन की लागत बहुत अधिक है। सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट्स में अक्सर स्वास्थ्य देखभाल और सामुदायिक सुविधाओं के लिए ज्यादा जगह की जरूरत होती है, जिससे बिक्री योग्य क्षेत्र (saleable area) कम हो जाता है। बढ़े हुए FAR से डेवलपर्स को कम जमीन पर अधिक निर्माण की सुविधा मिलेगी, जिससे प्रोजेक्ट्स अधिक आकर्षक बनेंगे और लागत का दबाव कम होगा। इसे सीनियर लिविंग को एक महत्वपूर्ण सामाजिक ढांचे (social infrastructure) के तौर पर देखा जा रहा है।

बढ़ती मांग और जनसांख्यिकीय बदलाव

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव उन परिवारों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगा जो अपने बुजुर्ग माता-पिता के लिए सुरक्षित और सहायक आवास की तलाश में हैं। भारत की बुजुर्ग आबादी 2050 तक दोगुनी होने की उम्मीद है, ऐसे में संगठित सीनियर लिविंग की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह नीति इस बढ़ती मांग को पूरा करने और क्षेत्र में संगठित विकास को बढ़ावा देने में मदद करेगी।

चुनौतियां बरकरार

हालांकि, इस पॉलिसी के कुछ महत्वपूर्ण पहलू भी हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट्स के संचालन (operational expenses) की लागत, जिसमें स्वास्थ्य देखभाल, सहायता प्राप्त जीवन (assisted living) सेवाएं और रखरखाव शामिल हैं, निवासियों के लिए एक बड़ी चिंता बनी हुई है। इसके अलावा, गुरग्राम जैसे शहरों में प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतें और एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्जेज (EDC) जैसे बढ़ते विकास शुल्क (development charges) इस पॉलिसी के फायदों को कुछ हद तक कम कर सकते हैं। यदि घनत्व (density) का ठीक से प्रबंधन न किया जाए तो यह शहर के बुनियादी ढांचे पर भी दबाव डाल सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.