Housing and Urban Development Corporation (HUDCO) के शेयरों में आज **2.32%** की तेज़ी देखी गई, शेयर **₹204.00** पर ट्रेड कर रहा है। यह उछाल कंपनी के दमदार फाइनेंशियल ईयर नतीजों के बाद आई है। HUDCO ने मार्च 2026 में समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने नेट प्रॉफिट में **49.66%** का शानदार इजाफ़ा दर्ज किया है।
सालाना मुनाफ़ा और रेवेन्यू में ज़बरदस्त ग्रोथ
HUDCO ने मार्च 2026 को खत्म हुए वित्तीय वर्ष के लिए ₹13,150.40 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पेश किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 27.53% ज़्यादा है। सबसे खास बात यह है कि कंपनी का नेट प्रॉफिट 49.66% बढ़कर ₹4,034.37 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल यह ₹2,709.14 करोड़ था। पिछले पाँच सालों में, कंपनी का रेवेन्यू करीब 89% बढ़ा है, और नेट प्रॉफिट 135% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज कर चुका है। कंपनी के Return on Equity (ROE) में भी सुधार देखने को मिला है, जो मार्च 2022 में 11.86% था, बढ़कर मार्च 2026 में 19.64% हो गया है।
बढ़ता हुआ डेट-इक्विटी रेशियो: एक चिंता का सबब?
जहां एक ओर कंपनी की मुनाफ़ेबाज़ी बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर कंपनी के बैलेंस शीट पर कर्ज़ का बोझ भी बढ़ता दिख रहा है। मार्च 2026 तक कंपनी का डेट-इक्विटी रेशियो बढ़कर 6.90 हो गया है, जो 2022 में 4.25 था। मार्च 2026 के अंत तक कंपनी की कुल देनदारियां और संपत्तियां बढ़कर ₹166,838 करोड़ हो गई हैं। कैश फ्लो स्टेटमेंट से पता चलता है कि फाइनेंसिंग एक्टिविटीज़ से ₹34,793 करोड़ का बड़ा इनफ्लो हुआ, लेकिन ऑपरेटिंग और इन्वेस्टिंग एक्टिविटीज़ से नेट कैश फ्लो नेगेटिव रहा। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी इस बढ़ते कर्ज़ को अपने लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग लक्ष्यों के साथ कैसे मैनेज करती है।
तिमाही नतीजों और डिविडेंड पर एक नज़र
हालांकि, जून 2026 की तिमाही के नतीजे मार्च 2026 की तिमाही के मुकाबले थोड़े मिले-जुले रहे। इस तिमाही में रेवेन्यू ₹3,717.17 करोड़ रहा, लेकिन नेट प्रॉफिट घटकर ₹851.11 करोड़ रह गया, जो मार्च 2026 की तिमाही में ₹1,981.31 करोड़ था। नतीजतन, Earnings Per Share (EPS) भी पिछले तिमाही के 9.90 से घटकर 4.25 रह गया। शेयरधारकों को पुरस्कृत करने के लिए, कंपनी ने हाल ही में ₹1.50 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड और ₹1.25 प्रति शेयर का इंटरिम डिविडेंड घोषित किया है। आगे चलकर, निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी लगातार मुनाफ़ा बनाए रखने और डेट-इक्विटी रेशियो को स्थिर रखने में कितनी कामयाब होती है, खासकर बदलती ब्याज दरों और हाउसिंग सेक्टर की मांग के बीच।
