सरकारी संपत्तियों में नई जान
भारत सरकार अपनी सरकारी कंपनियों (CPSEs) की बेकार पड़ी रियल एस्टेट संपत्तियों को कमाई का जरिया बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में इस योजना का ऐलान किया है, जिसके तहत सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSEs) की प्रॉपर्टीज को Real Estate Investment Trusts (REITs) के ज़रिए मोनेटाइज किया जाएगा।
मोनेटाइजेशन की अपार संभावनाएं
सरकारी कंपनियों के पास रेलवे, पोर्ट्स, ऑयल कंपनियों और बैंकों जैसी फील्ड्स में ₹10 लाख करोड़ से ज़्यादा की रियल एस्टेट संपत्ति होने का अनुमान है। इन संपत्तियों को REITs के ज़रिए चैनलाइज़ करने से निवेशकों को लगातार रेंटल इनकम (Rental Income) और बेहतर यील्ड-आधारित रिटर्न (Yield-based Returns) मिल सकता है। यह कदम भारत के कैपिटल मार्केट्स (Capital Markets) को और गहरा करेगा और पब्लिक सेक्टर की बैलेंस शीट को भी मजबूत करेगा।
मौजूदा REITs का प्रदर्शन
आपको बता दें कि भारत में REITs का बाजार 2019 में शुरू होने के बाद से काफी मजबूत हुआ है। मौजूदा समय में 5 लिस्टेड REITs 176 मिलियन वर्ग फुट से ज़्यादा प्रॉपर्टी संभाल रहे हैं, जिनकी कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (Asset Under Management) लगभग ₹2.35 लाख करोड़ है। इन REITs ने सॉवरेन वेल्थ फंड्स (Sovereign Wealth Funds) और पेंशन फंड्स (Pension Funds) जैसे बड़े निवेशकों को आकर्षित किया है, जो स्थिर रेंटल इनकम और भरोसेमंद डिस्ट्रीब्यूशन यील्ड (Distribution Yield) की वजह से निवेश कर रहे हैं।
क्या हैं चुनौतियां?
हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि CPSE REITs की सफलता सिर्फ प्रॉपर्टी के साइज पर ही निर्भर नहीं करेगी, बल्कि उनकी क्वालिटी और रेंटल स्ट्रेंथ (Rental Strength) पर भी टिकी रहेगी। सरकारी कंपनियों की कई प्रॉपर्टीज खंडित (Fragmented), नॉन-कोर (Non-core) हैं और पुरानी रेंट दरों पर लीज्ड (Leased) हैं। इन्हें सफल REITs बनाने के लिए प्रॉपर्टी में बड़े सुधार, लीज एग्रीमेंट्स को रीसेट करने और बेहतर टेनेंट मिक्स (Tenant Mix) की जरूरत होगी, ताकि ऑक्यूपेंसी (Occupancy) और टेनेंट क्वालिटी (Tenant Quality) के आधार पर टिकाऊ भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।