एनालिस्ट्स का भरोसा बढ़ा रहा स्टॉक:
अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्मों HSBC और Jefferies ने Godrej Properties के शेयरों को 'Buy' रेटिंग दी है, और इसके लिए ऊँचे टारगेट प्राइस सेट किए हैं। HSBC ने तो टारगेट ₹2,900 तक बढ़ा दिया है, जो लगभग 52.6% की छलांग का अनुमान लगाता है। इसके पीछे नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च, डेवलपमेंट प्लान्स और मार्केट की मजबूत डिमांड को वजह बताया गया है। ब्रोकरेज ने कंपनी की नेशनल रीच, मजबूत बैलेंस शीट, ब्रांड वैल्यू और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट स्किल्स की भी तारीफ की है। वहीं, Jefferies ने भी अपना टारगेट प्राइस बढ़ाकर ₹2,475 कर दिया है, जो FY28 तक 30% से ज्यादा ग्रोथ और फ्री कैश फ्लो में सुधार का अनुमान लगाता है। 10 साल बाद डिविडेंड (Dividend) देने का कंपनी का फैसला और प्रमोटर्स का 5% स्टेक खरीदना भी मैनेजमेंट के कॉन्फिडेंस को दिखाता है।
गिरता मुनाफा और बढ़ता खर्च:
लेकिन, Godrej Properties के लेटेस्ट फाइनेंशियल रिजल्ट्स कहानी का दूसरा पहलू दिखाते हैं। Q4 FY26 के लिए, कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 21.30% घटकर ₹219.20 करोड़ रह गया, जबकि टोटल इनकम (Total Income) मामूली 5.83% बढ़कर ₹1,436.31 करोड़ दर्ज की गई। तिमाही के दौरान ₹51.63 करोड़ का बढ़ी हुई इंटरेस्ट एक्सपेंस (Interest Expense) लैंड और प्रोजेक्ट डेवलपमेंट के लिए आक्रामक फंडिंग को दर्शाता है। हालांकि, Q4 FY26 में नेट सेल्स (Net Sales) ₹3,458.13 करोड़ तक पहुँच गई, जो रेवेन्यू ग्रोथ दिखाती है, पर प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव साफ है।
ओवरवैल्यूएशन और कम एफिशिएंसी:
ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) और पीयर्स (Peers) की तुलना में कंपनी का वैल्यूएशन (Valuation) थोड़ा महंगा लग रहा है। Godrej Properties का प्राइस-टू-अर्निंग्स (Price-to-Earnings) रेश्यो करीब 31-37x है, जो सेक्टर के औसत 35x के बराबर है। लेकिन, इसका रिटर्न ऑन इक्विटी (Return on Equity - ROE) काफी कम, 6.02%-6.57% है, जबकि Oberoi Realty का 12.9%-14.22% और DLF का 6.3%-9.96% है। इसका मतलब है कि निवेशक कम एफिशिएंसी के लिए प्रीमियम पे कर रहे हैं। Q4 FY26 में -2.85% का नेगेटिव रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (Return on Capital Employed - ROCE) इस चिंता को और बढ़ाता है।
बढ़ता कर्ज और कैश फ्लो की कमी:
लीवरेज (Leverage) और कैश फ्लो जनरेशन (Cash Flow Generation) Godrej Properties के लिए बड़ी चिंताएं हैं। अधिग्रहण (Acquisitions) के कारण कंपनी का डेट-टू-इक्विटी (Debt-to-Equity) रेश्यो मई 2026 तक 0.35 था और यह बढ़ रहा है। मैनेजमेंट इसे मैनेजेबल बता रहा है, लेकिन यह रेश्यो लगभग डेट-फ्री पीयर्स जैसे DLF और Oberoi Realty से ज्यादा है। कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो (Operating Cash Flow) भी नेगेटिव रहा है, यानी कंपनी का रोज़मर्रा का बिजनेस कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त कैश जेनरेट नहीं कर पा रहा है।
खरीदारों की शिकायतें और कानूनी जांच:
ऑपरेशनल और रेपुटेशनल इश्यूज (Reputational Issues) भी Godrej Properties को परेशान कर रहे हैं। खरीदारों ने प्रोजेक्ट में देरी, खराब कंस्ट्रक्शन क्वालिटी और कंपनी के रिस्पांस न देने को लेकर कई शिकायतें दर्ज कराई हैं। यूनिट लेआउट (Unit Layouts) की अक्षमता और फॉल्टी इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन्स (Faulty Electrical Installations) जैसी समस्याएं कंपनी की प्रीमियम इमेज को धूमिल कर रही हैं। इसके अलावा, कंपनी कई गंभीर कानूनी और रेगुलेटरी जांचों का सामना कर रही है। CBI ने Chandigarh प्रोजेक्ट, Godrej Eternia में कथित एनवायर्नमेंटल वायलेशन्स (Environmental Violations) को लेकर FIR दर्ज की है। एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (Enforcement Directorate - ED) भी एक ज्वॉइंट वेंचर पार्टनर, Orris Infrastructure से जुड़े फ्रॉड (Fraud) और मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के आरोपों की जांच कर रहा है, हालांकि Godrej Properties इन आरोपों से इनकार करती है। Land Under Construction (LUC) टैक्स चार्ज को लेकर पुराने विवाद भी चिंता का विषय बने हुए हैं।
रियल एस्टेट सेक्टर का मिला-जुला आउटलुक:
भारतीय रियल एस्टेट मार्केट में 2026 तक ग्रोथ की उम्मीद है, जो मजबूत GDP ग्रोथ और इन्वेस्टमेंट से सपोर्टेड है। कमर्शियल और रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज, दोनों की डिमांड हाई है। Godrej Properties अपनी नेशनल प्रेजेंस और ब्रांड के कारण इस मार्केट से फायदा उठाने की अच्छी स्थिति में है। हालांकि, हाल की ग्लोबल अनिश्चितताएं खरीदारों के सेंटिमेंट (Buyer Sentiment) और पूरे सेक्टर में सेल्स के लिए शॉर्ट-टर्म चुनौतियां पैदा कर सकती हैं।
