नतीजों का पूरा चिट्ठा
Godrej Properties Limited (GPL) के लिए तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे मिले-जुले रहे। जहाँ स्टैंडअलोन बेसिस पर कंपनी के प्रॉफिट में जबरदस्त उछाल आया, वहीं कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में भारी गिरावट देखी गई।
स्टैंडअलोन नतीजे:
कंपनी का स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 73.1% बढ़कर ₹60.34 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल यह ₹34.85 करोड़ था। स्टैंडअलोन रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस में भी 45.1% की बढ़ोतरी होकर ₹268.48 करोड़ दर्ज किया गया।
मगर, नौ महीने (9M FY26) के नतीजों पर नजर डालें तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखती है। इस दौरान स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 54.9% की भारी गिरावट आई और यह ₹466.81 करोड़ पर आ गया, जबकि PAT 82.3% घटकर ₹129.56 करोड़ रह गया।
कंसोलिडेटेड नतीजे:
कंसोलिडेटेड आधार पर, Q3 FY26 में रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस 48.6% गिरकर ₹498.36 करोड़ पर आ गया। इसके बावजूद, कंसोलिडेटेड PAT में 21.9% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹192.98 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले साल ₹158.20 करोड़ था।
नौ महीने (9M FY26) के लिए, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 40.3% घटकर ₹1,673.30 करोड़ हो गया, लेकिन PAT 14.3% बढ़कर ₹1,155.74 करोड़ रहा।
आमदनी में उछाल का राज़ और मार्जिन का खेल
कंपनी के PAT में आई यह तेजी सिर्फ ऑपरेशंस से नहीं, बल्कि 'अन्य आय' (Other Income) के बड़ा होने से भी आई है। कंसोलिडेटेड PAT में जो उछाल दिखा, उसमें 'अन्य आय' का बड़ा योगदान रहा, जो 97.5% बढ़कर ₹535.48 करोड़ हो गई। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह एक ज्वाइंट वेंचर (Joint Venture) के अधिग्रहण पर मिला फेयर वैल्यू गेन (Fair Value Gain) बताया जा रहा है।
मार्जिन की कहानी:
- स्टैंडअलोन ऑपरेटिंग मार्जिन सुधरा है, लेकिन अभी भी नेगेटिव (-63.23%) है, जबकि पिछले साल यह -94.98% था।
- कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग मार्जिन काफी बिगड़ा है, जो -34.19% पर आ गया, जबकि पिछले साल यह -5.76% था।
- हालांकि, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट मार्जिन में जबरदस्त सुधार आया है, जो 19.02% तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह 12.95% था।
- कंसोलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA मार्जिन भी बढ़कर 34.40% हो गया।
कर्ज़ का बोझ और खास खर्चे
हाल ही में लागू हुए नए लेबर कोड्स (Labour Codes) के कारण कंपनी को कुछ खास खर्चे (Exceptional Items) भी हुए हैं, जो स्टैंडअलोन लेवल पर ₹16.12 करोड़ और कंसोलिडेटेड लेवल पर ₹21.08 करोड़ रहे।
कंपनी के लिए चिंता की बात यह है कि वित्तीय लिवरेज (Financial Leverage) बढ़ा है। स्टैंडअलोन डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) 0.82 से बढ़कर 0.99 हो गया, और नेट डेट-टू-इक्विटी 0.24 से बढ़कर 0.46 हो गया। कंसोलिडेटेड बेसिस पर भी यह रेश्यो 0.88 से 0.97 (ग्रॉस) और 0.30 से 0.37 (नेट) हो गया है, जो ज्यादा उधार का संकेत देता है।
सेगमेंट्स का प्रदर्शन
रियल एस्टेट सेगमेंट, जो कंपनी का मुख्य रेवेन्यू सोर्स है, उसमें कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में भारी गिरावट आई है, जो Q3 FY25 के ₹938.56 करोड़ से घटकर Q3 FY26 में ₹466.34 करोड़ रह गया। हॉस्पिटैलिटी सेगमेंट का रेवेन्यू थोड़ा बढ़कर ₹32.02 करोड़ हुआ है।
आगे की राह
कंपनी ने भविष्य के लिए कोई खास गाइडेंस नहीं दी है। निवेशकों को अब GPL की बढ़ते कर्ज़ को संभालने और खासकर रियल एस्टेट सेगमेंट में रेवेन्यू बढ़ाने की क्षमता पर बारीकी से नजर रखनी होगी। ज्वाइंट वेंचर अधिग्रहण का कंपनी की भविष्य की प्रॉफिटेबिलिटी पर क्या असर पड़ता है, यह भी देखना अहम होगा।
