ज़मीन खरीदने की आंधी
Godrej Properties अपनी ज़मीन बैंक करने की रणनीति पर तेज़ी से आगे बढ़ रही है। कंपनी ने ग्रेटर नोएडा के DMIC इंटीग्रेटेड टाउनशिप में 23.2 एकड़ का एक बड़ा रेजिडेंशियल प्लॉट ई-ऑक्शन के ज़रिए जीत लिया है। इस नए प्रोजेक्ट से कंपनी के पाइपलाइन में ₹7,000 करोड़ से ज़्यादा का रेवेन्यू आने का अनुमान है। यह ज़मीन 93,905 वर्ग मीटर के स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर ज़ोन में है और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास होने का फायदा उठाएगी। यह कदम कंपनी की मुंबई के बाहर, तेज़ी से बढ़ते इलाकों में अपनी पकड़ मज़बूत करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।
मुनाफे की अस्थिरता का जाल
Q4FY26 के नतीजे भले ही शानदार दिख रहे हों - नेट प्रॉफिट में 70% का उछाल आकर ₹650 करोड़ हुआ और रेवेन्यू 63% बढ़कर ₹3,458 करोड़ रहा - लेकिन संस्थागत निवेशक इनগুলোর क्वालिटी पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। रियल एस्टेट अकाउंटिंग में अक्सर प्रोजेक्ट पूरा होने पर ही रेवेन्यू दर्ज होता है, जिससे तिमाही नतीजों में बड़े उतार-चढ़ाव आते हैं। एनालिसिस से पता चलता है कि तिमाही के प्रॉफिट बिफोर टैक्स का लगभग 40% 'अन्य आय' (Other Income) से आया है, जो कंपनी के ऑपरेशनल प्रॉफिट की स्थिरता पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, ऑपरेशनल मार्जिन (अन्य आय को छोड़कर) पिछले साल के 5.2% से सुधरकर 15.1% हो गया है, यह अभी भी टॉप डेवलपर्स के मुकाबले कम है।
विश्लेषकों की राय और आगे का रास्ता
कुल मिलाकर 22 एनालिस्ट्स में से ज़्यादातर 'Buy' रेटिंग के साथ सावधानी से आशावादी हैं। हालांकि, टारगेट प्राइस लगभग ₹2,267 पर बना हुआ है, जो हाल के स्तरों से सीमित बढ़त का संकेत देता है। कंपनी ने ₹10 प्रति शेयर का डिविडेंड भी घोषित किया है, जो एक दशक में पहली बार है। कुछ इसे अंदरूनी वित्तीय मजबूती का संकेत मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे शेयर के सुस्त प्रदर्शन के बीच शेयरधारकों को खुश करने की एक चाल के तौर पर देख रहे हैं। स्टॉक का P/E करीब 28.5x पर है, जो वैल्यूएशन को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
