Indian Real Estate: क्लाइमेट रिस्क से निपटने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स ने बदली रणनीति

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Real Estate: क्लाइमेट रिस्क से निपटने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स ने बदली रणनीति

भारतीय रियल एस्टेट मार्केट में ग्लोबल इन्वेस्टर्स का रुख बदल रहा है। अब ये निवेशक अपनी संपत्तियों को बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर लाखों खर्च कर रहे हैं, ताकि रेंटल यील्ड (Rental Yield) सुरक्षित रह सके।

भारत के प्रॉपर्टी सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ग्लोबल इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स अब रियल एस्टेट एसेट्स की वैल्यूएशन का तरीका बदल रहे हैं। पहले जो काम सिर्फ मेंटेनेंस का हिस्सा माना जाता था, आज वह प्रॉपर्टी की वैल्यू तय करने का मुख्य पैमाना बन चुका है। निवेशक अब साइट एलिवेशन, ड्रेनेज सिस्टम और फ्लड बैरियर्स जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में पैसा लगा रहे हैं।

बड़े खिलाड़ियों का दांव

इंस्टिट्यूशनल दिग्गज अब क्लाइमेट-रिस्क असेसमेंट को अपने निवेश का अनिवार्य हिस्सा बना रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, Brookfield Asset Management ने मुंबई के इक्विनॉक्स बिजनेस पार्क में $26 मिलियन का निवेश साइट एलिवेशन और बाढ़ से बचाव के लिए किया, जिसके चलते वहां ऑक्यूपेंसी लेवल 99% से ऊपर बनी हुई है। इसी सफलता को देखते हुए Blackstone और CapitaLand Investment जैसी दिग्गज कंपनियां भी अब नई डील से पहले कड़े क्लाइमेट-रिस्क स्क्रीनिंग कर रही हैं।

निर्माण की लागत और प्रीमियम

डेवलपर्स के लिए यह बदलाव थोड़ा महंगा साबित हो रहा है। DLF और Sattva Group जैसे बड़े नाम अब अपने प्रोजेक्ट्स में इन सुरक्षा उपायों को शामिल कर रहे हैं, जिससे निर्माण लागत में ₹100 से ₹200 प्रति स्क्वायर फुट का इजाफा हो रहा है। हालांकि, कंपनियां इसे एक जरूरी निवेश मान रही हैं क्योंकि इससे वे बड़े कॉर्पोरेट किरायेदारों को आकर्षित कर पा रही हैं, जो ऐसी सुरक्षित इमारतों के लिए ज्यादा किराया देने को भी तैयार हैं।

रिस्क और चुनौतियां

क्लाइमेट-प्रूफिंग से एसेट्स की वैल्यू तो बढ़ रही है, लेकिन निवेशकों को इंश्योरेंस प्रीमियम जैसे नए जोखिमों पर भी नजर रखनी होगी। इमारतों के क्लाइमेट-रिस्क प्रोफाइल के आधार पर इंश्योरेंस प्रीमियम तय किए जा रहे हैं। यदि यह लागत बढ़ती रही, तो डेवलपर के मार्जिन पर दबाव आ सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या क्लाइमेट-रेजिलिएंट प्रॉपर्टीज पारंपरिक संपत्तियों के मुकाबले बेहतर रेंटल रिटर्न दे पाती हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.