Gillco Group मोहाली में ₹800 करोड़ का एक लग्जरी रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट लॉन्च कर रहा है, जिसका लक्ष्य ₹1,200 करोड़ की बिक्री आय हासिल करना है। 12 एकड़ में फैले इस प्रोजेक्ट में 444 हाई-एंड अपार्टमेंट होंगे, जिनके चार साल में पूरा होने की उम्मीद है।
मोहाली में ₹800 करोड़ का बड़ा निवेश
Gillco Group ने मोहाली के सेक्टर 126 में एक नए रेजिडेंशियल डेवलपमेंट का ऐलान किया है। कंपनी इस प्रोजेक्ट पर ₹800 करोड़ का भारी निवेश कर रही है और इसका लक्ष्य कुल ₹1,200 करोड़ का रेवेन्यू कमाना है। यह प्रोजेक्ट PR-7 एयरपोर्ट रोड पर 12 एकड़ जमीन पर विकसित किया जा रहा है। इसमें छह रेजिडेंशियल टावर बनाए जाएंगे, जिनमें कुल 444 हाई-एंड अपार्टमेंट होंगे। ये अपार्टमेंट लग्जरी सेगमेंट के होंगे और 3+1 तथा 4+1 बेडरूम के कॉन्फ़िगरेशन में आएंगे। रेजिडेंशियल स्पेस के अलावा, यहां एक क्लब हाउस, वेलनेस सुविधाएं, स्पोर्ट्स एरिया और एक रिटेल सेक्शन भी होगा।
प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और शुरुआती बिक्री
कंपनी ने बताया कि जरूरी सरकारी अप्रूवल मिलने के बाद कंस्ट्रक्शन का काम शुरू हो चुका है। डेवलपर्स ने इसे चार साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा है, जो रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) के नियमों के तहत होगा। RERA के नियम यह सुनिश्चित करते हैं कि डेवलपर्स प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करें और खरीदारों के साथ पारदर्शिता बनाए रखें। लॉन्च के पहले फेज में, Gillco Group ने 250 अपार्टमेंट की बिक्री शुरू कर दी है। कंपनी के अनुसार, इन यूनिट्स की कीमत लगभग ₹11,500 प्रति वर्ग फुट से शुरू होती है। वहीं, एक अपार्टमेंट की कीमत ₹4 करोड़ से शुरू हो सकती है, जो अपार्टमेंट के साइज और लोकेशन पर निर्भर करेगा।
मार्केट का हाल और संभावित रिस्क
चंडीगढ़-मोहाली रीजन में रियल एस्टेट मार्केट को समझना निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है। बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के कारण इस क्षेत्र में ग्रोथ देखने को मिली है, जिससे प्रीमियम हाउसिंग की मांग बढ़ी है। हालांकि, बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में कुछ खास जोखिम होते हैं, जैसे कि कंस्ट्रक्शन लागत का बढ़ना, जिससे प्रॉफिट मार्जिन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, रियल एस्टेट एक साइक्लिकल सेक्टर है। अगर प्रीमियम हाउसिंग मार्केट में मांग कम होती है, तो बिक्री की रफ्तार और असल रेवेन्यू कंपनी के अनुमानों से अलग हो सकता है। डेवलपर्स को भारी कैपिटल खर्च के साथ-साथ कैश फ्लो मैनेजमेंट का भी ध्यान रखना होता है ताकि प्रोजेक्ट पूरा हो सके। इस प्रोजेक्ट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी तय समय पर कंस्ट्रक्शन पूरा कर पाती है या नहीं और प्रतिस्पर्धी बाजार में हाई-वैल्यू प्रॉपर्टीज की मांग बनी रहती है या नहीं। आने वाले कुछ सालों में बिक्री और कंस्ट्रक्शन की रफ्तार पर नजर रखी जाएगी, जो प्रोजेक्ट के प्रदर्शन के अहम संकेतक होंगे।
