जार्जिया का प्रॉपर्टी मार्केट इन दिनों विदेशी निवेशकों के लिए हॉटस्पॉट बना हुआ है। त्बिलिसी (Tbilisi) और बटुमी (Batumi) जैसे शहरों में रेंटल यील्ड औसतन **7.42%** मिल रही है, जो मुंबई जैसे बड़े शहरों से काफी ज्यादा है।
बाजार की चमक का राज
जार्जिया के रियल एस्टेट मार्केट में भारतीय और यूरोपीय निवेशकों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 की शुरुआत में यहाँ की ग्रॉस रेंटल यील्ड औसतन 7.42% रही है, जबकि राजधानी त्बिलिसी में यह आंकड़ा 7.53% के आसपास है। तुलना करें तो मुंबई और दुबई जैसे स्थापित फाइनेंशियल सेंटर्स में रेंटल रिटर्न इससे काफी पीछे हैं।
क्यों बढ़ रहा है निवेश?
इस ग्रोथ के पीछे मुख्य वजह हॉस्पिटैलिटी-इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट्स हैं। अब डेवलपर्स पुराने हाउसिंग मॉडल्स को छोड़कर होटल मैनेजमेंट सेवाओं वाले प्रोजेक्ट्स पर जोर दे रहे हैं, जिससे निवेशकों को टूरिज्म सेक्टर से जुड़ी रेगुलर इनकम मिल रही है। वर्ल्ड बैंक ने भी जार्जिया की 2026 की इकोनॉमिक ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया है। साथ ही, अगस्त 2026 तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार $8 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है।
टैक्स नियमों की बात करें तो, यदि कोई निवेशक $150,000 से ज्यादा का निवेश करता है, तो उसे रेजिडेंस परमिट मिलता है। इसके अलावा, 2 साल से अधिक समय तक संपत्ति रखने पर रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी गेन्स पर इनकम टैक्स में छूट मिलती है, जिससे Alliance Group जैसी कंपनियां भारतीय निवेशकों के लिए निवेश के नए रास्ते खोल रही हैं।
रिस्क को नजरअंदाज न करें
निवेशकों को यह समझना होगा कि विज्ञापित 'ग्रॉस यील्ड' और हाथ में आने वाली 'नेट यील्ड' में बड़ा अंतर हो सकता है। मेंटेनेंस, वैकेंसी और मैनेजमेंट फीस के चलते नेट रिटर्न 1.5% से 3% तक कम हो सकता है। जार्जिया एक छोटी और ओपन इकोनॉमी है, इसलिए यहां भू-राजनीतिक अस्थिरता, करेंसी में उतार-चढ़ाव और लिक्विडिटी का जोखिम भी बना रहता है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को बटुमी जैसे शहरों में बढ़ती सप्लाई के बीच रेंटल डिमांड की स्थिरता पर नजर रखनी चाहिए। अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग करते समय टैक्स और मैनेजमेंट खर्चों को घटाकर नेट इनकम का आकलन करना बेहद जरूरी है।
