India Office Leasing: GCCs का दबदबा, IT कंपनियों की घटती हिस्सेदारी! H1 2026 में आया बड़ा बदलाव

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India Office Leasing: GCCs का दबदबा, IT कंपनियों की घटती हिस्सेदारी! H1 2026 में आया बड़ा बदलाव

2026 की पहली छमाही में भारत के ऑफिस स्पेस मार्केट में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) ने रिकॉर्ड **43%** हिस्सेदारी हासिल की है, वहीं ट्रेडिशनल IT सर्विस फर्म्स का शेयर घटकर सिर्फ **13%** रह गया है।

भारत के रियल एस्टेट मार्केट में बड़ा बदलाव

भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट में ऑफिस स्पेस की मांग का ट्रेंड पूरी तरह बदल गया है। लेटेस्ट इंडस्ट्री डेटा के मुताबिक, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) अब ऑफिस स्पेस के सबसे बड़े खरीदार बन गए हैं। दूसरी ओर, ट्रेडिशनल थर्ड-पार्टी IT सर्विस कंपनियां अपने ऑफिस फुटप्रिंट को कम कर रही हैं। इस बदलाव की एक बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता इस्तेमाल और कंपनियों की बदलती वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी है।

IT कंपनियों से GCCs की ओर झुकाव

2026 की पहली छमाही में, थर्ड-पार्टी IT सर्विस फर्म्स की डिमांड में भारी गिरावट आई है। पिछले साल इसी अवधि में 22% मार्केट शेयर रखने वाली इन कंपनियों का हिस्सा घटकर सिर्फ 13% रह गया। यानी, उन्होंने 6.4 मिलियन वर्ग फुट जगह ली, जो पिछले साल के 10.9 मिलियन वर्ग फुट से काफी कम है। एनालिस्ट्स का मानना है कि AI पर फोकस और सर्विस डिलीवरी के बदलते तरीकों के कारण कंपनियां अपनी टीम साइज को ऑप्टिमाइज़ कर रही हैं।

वहीं, GCCs ने कमाल का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कुल ऑफिस लीजिंग का 43% हिस्सा यानी 20.6 मिलियन वर्ग फुट जगह अपने नाम की। पिछले साल यह हिस्सेदारी 39% थी। इसके अलावा, फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ऑपरेटर्स की हिस्सेदारी भी 21% से बढ़कर 24% हो गई है, जो हाइब्रिड वर्क मॉडल को अपनाने वाली कंपनियों की बढ़ती संख्या को दर्शाता है।

मार्केट परफॉर्मेंस और 'फ्लाइट टू क्वालिटी'

भारत के आठ प्रमुख शहरों में H1 2026 में कुल ऑफिस लीजिंग 48 मिलियन वर्ग फुट रही। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 2% कम है, लेकिन अब तक का दूसरा सबसे बड़ा हाफ-ईयरली परफॉरमेंस है। यह दिखाता है कि ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत में हाई-क्वालिटी ऑफिस स्पेस की मांग मजबूत बनी हुई है।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्केट में 'फ्लाइट टू क्वालिटी' का ट्रेंड दिख रहा है। कंपनियां अब मॉडर्न, टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड बिल्डिंग्स को प्राथमिकता दे रही हैं। यह स्पेस की कुल कमी नहीं, बल्कि कब्जाधारकों के प्रकार में बदलाव है। कंपनियां लागत से ज़्यादा भारत की इंजीनियरिंग और डिजिटल टैलेंट की गहराई के कारण यहां निवेश कर रही हैं। इस ट्रेंड से प्रीमियम बिजनेस पार्क्स में रेंटल ग्रोथ को सपोर्ट मिल रहा है।

आगे चलकर, रियल एस्टेट डेवलपर्स को हाई-स्पेसिफिकेशन और सस्टेनेबल ऑफिस स्पेस बनाने पर ध्यान देना होगा, जो GCCs और इनोवेशन-फोकस्ड बिजनेसेज की बदलती जरूरतों को पूरा कर सकें। निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या यह लीजिंग की रफ़्तार साल की दूसरी छमाही में भी जारी रह पाती है या नहीं।

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