GCCs का दबदबा: भारत में ऑफिस लीजिंग में **45%** हिस्सेदारी, किराया **9%** बढ़ा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
GCCs का दबदबा: भारत में ऑफिस लीजिंग में **45%** हिस्सेदारी, किराया **9%** बढ़ा

साल 2026 के पहले हाफ (H1) में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) ने 19.2 मिलियन वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लीज किया। इस भारी डिमांड के चलते ऑफिस रेंट में **9%** की बढ़ोतरी हुई है। बेंगलुरु और हैदराबाद इस ट्रेंड में सबसे आगे हैं, जिससे देश भर में ऑफिस की खाली पड़ी जगह (vacancy rate) घटकर **15%** रह गई है।

भारत के रियल एस्टेट मार्केट में GCCs का जलवा

साल 2026 के पहले छह महीनों में भारत का कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट काफी मजबूत दिखा है, जिसकी मुख्य वजह ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का तेजी से विस्तार है। डेटा के अनुसार, इन सेंटर्स ने देश के सात बड़े शहरों में कुल 42.6 मिलियन वर्ग फुट ऑफिस स्पेस की लीजिंग में 45% का बड़ा योगदान दिया है। पिछले साल इसी अवधि में यह हिस्सेदारी 41% थी।

मार्केट फंडामेंटल्स और किराए पर असर

ऑफिस मार्केट अब एक बेहतर स्थिति में पहुँच गया है, जहां मांग और सप्लाई के बीच एक अच्छा संतुलन देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ लीजिंग एक्टिविटी मजबूत बनी रही, वहीं डेवलपर्स ने नए प्रोजेक्ट्स को लेकर सावधानी बरती। नए ऑफिस कंप्लीशन में 10% की गिरावट आई और यह 22.15 मिलियन वर्ग फुट तक सीमित रहा। वहीं, नेट एब्जॉर्प्शन (यानी ऑक्यूपाइड स्पेस) में 2% का इजाफा हुआ और यह 27.44 मिलियन वर्ग फुट पर पहुंच गया। मांग में स्थिरता और नए निर्माण पर नियंत्रण के इस कॉम्बिनेशन के कारण, औसत ऑफिस रेंट 9% बढ़कर ₹96 प्रति वर्ग फुट हो गया, जबकि पिछले साल यह ₹88 था।

रीजनल परफॉर्मेंस और ग्रोथ के मुख्य कारण

इस एक्टिविटी का मुख्य केंद्र दक्षिणी शहर बने हुए हैं। बेंगलुरु सबसे बड़ा मार्केट बना रहा, जहां 10.8 मिलियन वर्ग फुट की ग्रॉस लीजिंग दर्ज की गई, जिसमें से 70% स्पेस GCCs ने लिया। चेन्नई और हैदराबाद में भी GCCs की भागीदारी खास रही, जिसने उनके ग्रॉस लीजिंग वॉल्यूम में क्रमशः 55% और 48% का योगदान दिया। इन दोनों शहरों, बेंगलुरु और हैदराबाद ने मिलकर, साल के पहले हाफ में भारत के नेट ऑफिस एब्जॉर्प्शन का लगभग 50% हिस्सा कवर किया, जो कि पिछले साल की तुलना में क्रमशः 26% और 24% की बढ़ोतरी दिखाता है।

डाइवर्सिफिकेशन और फ्यूचर ट्रेंड्स

GCCs जहां एक बड़े कैटेलिस्ट हैं, वहीं मांग का आधार और भी विस्तृत हो रहा है। पारंपरिक IT और ITeS सेक्टर 26% मार्केट शेयर के साथ सबसे आगे है, जिसके बाद फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस प्रोवाइडर्स 25% पर हैं। बैंकिंग (BFSI), मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल सेक्टरों के बढ़ते फुटप्रिंट्स भी इस ग्रोथ को सहारा दे रहे हैं। 15% की टाइट वेकेंसी रेट (जो पिछले साल 16.3% थी) यह संकेत देती है कि प्रॉपर्टी ओनर्स को प्रमुख ऑफिस कॉरिडोर्स में प्राइसिंग पावर मिलती रह सकती है। इस स्पेस पर नज़र रखने वाले इन्वेस्टर्स को भविष्य में सप्लाई एडिशन पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि डेवलपर्स का नए निर्माण में अनुशासन बनाए रखना मौजूदा रेंटल ग्रोथ को बनाए रखने और हैदराबाद जैसे शहरों में वेकेंसी लेवल्स को मैनेज करने के लिए महत्वपूर्ण होगा, जहां अभी भी अन्य बड़े शहरी केंद्रों की तुलना में वेकेंसी अधिक है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.