Indian Office Market: GCC की डिमांड से रेंट में **9%** का उछाल, प्रीमियम प्रॉपर्टीज की धूम

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Office Market: GCC की डिमांड से रेंट में **9%** का उछाल, प्रीमियम प्रॉपर्टीज की धूम

साल **2026** की पहली छमाही में भारत के ऑफिस लीजिंग मार्केट में Global Capability Centres (GCC) का दबदबा रहा है। कुल लीजिंग में **45%** हिस्सेदारी के चलते ऑफिस रेंट में **9%** की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

बाजार का हाल और रेंट का गणित

भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर में इस समय लैंडलॉर्ड्स का पलड़ा भारी है। 2026 की पहली छमाही में GCCs ने कुल 19.2 मिलियन स्क्वायर फीट जगह लीज पर ली है। सप्लाई में 10% की गिरावट के चलते नई सप्लाई केवल 22.2 मिलियन स्क्वायर फीट तक सीमित रही है, जिससे मार्केट में स्पेस की कमी हो गई है। इसका सीधा असर रेंट पर पड़ा है, जो अब औसतन ₹96 प्रति स्क्वायर फीट तक पहुंच गया है।

प्रमुख शहर और बदलती पसंद

बेंगलुरु इस पूरे मूवमेंट का मुख्य केंद्र बना हुआ है, जहां देश की कुल GCC डिमांड का 39% हिस्सा देखा गया है। अब केवल IT कंपनियां ही नहीं, बल्कि BFSI, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियां भी भारत में अपने सेंटर बढ़ा रही हैं।

ग्रीन बिल्डिंग्स की बढ़ती मांग

इन्वेस्टर्स के लिए यह ध्यान देना जरूरी है कि अब मार्केट में 'क्वालिटी' का बोलबाला है। 73% लीजिंग अब ऐसी बिल्डिंग्स में हो रही है जो ग्रीन-सर्टिफाइड हैं। ऐसी स्थिति में पुरानी और बिना सर्टिफिकेशन वाली प्रॉपर्टीज में खाली रहने का रिस्क बढ़ सकता है।

क्या हैं चुनौतियां?

मार्केट में तेजी जरूर है, लेकिन ग्लोबल मैक्रोइकॉनॉमिक हालात और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं कंपनियों की हायरिंग और विस्तार को प्रभावित कर सकती हैं। साथ ही, स्टील जैसी कंस्ट्रक्शन सामग्री की बढ़ती कीमतें डेवलपर्स के प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन पर दबाव बना सकती हैं। आने वाले समय में नई सप्लाई और डिमांड का संतुलन ही तय करेगा कि रेंट में यह तेजी आगे भी बनी रहेगी या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.