फेस्टिव सीजन में मिलने वाले लुभावने ऑफर्स अक्सर असली लागत को छुपा देते हैं। घर खरीदने से पहले RERA अप्रूवल, लीगल टाइटल और कुल खर्च का सही गणित समझना बेहद जरूरी है।
त्योहारी सीजन में रियल एस्टेट डेवलपर्स सेल्स बढ़ाने के लिए मार्केटिंग का जोर बढ़ा देते हैं। सीमित समय के डिस्काउंट, मुफ्त इंटीरियर या स्टांप ड्यूटी माफी जैसे ऑफर्स एक तरह की जल्दबाजी पैदा करते हैं, जो अक्सर प्रॉपर्टी की असल वित्तीय लागत को छुपा देते हैं। एक रिटेल बायर के तौर पर आपको इन अस्थायी लालच से ऊपर उठकर संपत्ति की लॉन्ग-टर्म वैल्यू देखनी चाहिए।
डिस्काउंट के जाल से बचें
कई फेस्टिव ऑफर्स सिर्फ मनोवैज्ञानिक ट्रिगर होते हैं। एक आम तरीका यह है कि डिस्काउंट देने से ठीक पहले प्रॉपर्टी की बेस प्राइस बढ़ा दी जाती है। निवेशकों को ऐसी छूटों को संदेह की नजर से देखना चाहिए। इसकी सही जांच के लिए उस इलाके में हाल ही में हुए समान प्रोजेक्ट्स की रजिस्ट्री से पर स्क्वायर फीट रेट की तुलना करें। अगर डिस्काउंट के बाद भी रेट एरिया के ऐतिहासिक औसत से ज्यादा है, तो यह सौदा आकर्षक नहीं है।
कानूनी और रेगुलेटरी जांच
सबसे अहम कदम है प्रोजेक्ट का RERA रजिस्ट्रेशन चेक करना। यह कोई औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह सबूत है कि प्रोजेक्ट कानूनी मानकों पर खरा है। इसे स्टेट RERA की आधिकारिक वेबसाइट पर जरूर वेरिफाई करें। साथ ही, जमीन के टाइटल और बिल्डिंग प्लान को भी खुद देखें। सेल्स टीम के मौखिक वादों पर भरोसा करना भविष्य में कानूनी मुसीबत को न्योता देना हो सकता है। किसी प्रोफेशनल वकील से एग्रीमेंट की शर्तें, जैसे पजेशन टाइमलाइन और लेआउट बदलाव के नियम जरूर पढ़वाएं।
असली लागत का गणित
प्रॉपर्टी की कुल जेब से जाने वाली रकम बेस प्राइस से काफी ज्यादा होती है। इसमें GST, स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और लोकेशन चार्जेस जैसे खर्च शामिल होते हैं, जो आपकी कुल लागत में 10% से 15% तक इजाफा कर सकते हैं। अपनी सारी सेविंग्स डाउन पेमेंट में न झोंकें। इंटीरियर, मेंटेनेंस डिपॉजिट और हर महीने जाने वाली होम लोन EMI के लिए पर्याप्त लिक्विडिटी रखना बहुत जरूरी है।
