FabInvest: हैदराबाद में हुआ ₹75 करोड़ का बड़ा निवेश, कमर्शियल रियल एस्टेट की ओर कंपनी का रुख

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
FabInvest: हैदराबाद में हुआ ₹75 करोड़ का बड़ा निवेश, कमर्शियल रियल एस्टेट की ओर कंपनी का रुख

फ्रैक्शनल रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म FabInvest ने हैदराबाद के हाई-टेक सिटी में एक ग्रेड-ए ऑफिस टावर में ₹75 करोड़ का निवेश किया है। यह कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा निवेश है, जिससे इसका कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) **₹305 करोड़** के पार पहुंच गया है।

बड़ा निवेश और बदलती रणनीति

FabInvest ने हैदराबाद की व्यस्त कॉर्पोरेट लोकेशन, हाई-टेक सिटी में एक ग्राउंड प्लस 16 मंजिला टावर में ₹75 करोड़ लगाए हैं। अब तक कंपनी का ध्यान छोटे रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स पर था, जहां निवेश का आकार ₹20 करोड़ से ₹30 करोड़ के बीच रहता था। अब बड़े कमर्शियल एसेट्स में कदम रखकर कंपनी मल्टीनेशनल कंपनियों को किराएदार के तौर पर आकर्षित करना चाहती है।

रिटेल निवेशकों के लिए क्या है खास?

फ्रैक्शनल ओनरशिप के जरिए छोटे निवेशक अब बड़ी और महंगी इमारतों का हिस्सा बन सकते हैं, जिसके लिए पहले भारी-भरकम पूंजी की जरूरत होती थी। हालांकि, निवेशकों को SEBI के नए नियमों पर नजर रखनी चाहिए। SEBI ने स्मॉल एंड मीडियम REITs (SM REITs) के लिए फ्रेमवर्क जारी किया है, जो ऐसी निवेश कंपनियों के कामकाज में अधिक पारदर्शिता और सुरक्षा लाता है।

रिस्क और लिक्विडिटी का ध्यान रखें

कमर्शियल प्रॉपर्टी से मिलने वाला रेंटल इनकम लुभावना जरूर है, लेकिन इसमें लिक्विडिटी की कमी एक बड़ा चैलेंज है। स्टॉक मार्केट में लिस्टेड शेयरों के उलट, फ्रैक्शनल रियल एस्टेट शेयरों को तुरंत बेचना मुश्किल हो सकता है। यदि ऑफिस टावर में खालीपन बढ़ता है या किराएदार जगह छोड़ते हैं, तो रेंटल इनकम में गिरावट सीधी निवेशकों की कमाई पर असर डाल सकती है। भविष्य में निवेशकों को कंपनी की ऑक्यूपेंसी रेट और एग्जिट ऑप्शंस पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.