Real Estate Sector: RERA कानून में बड़े बदलाव की मांग, **₹12.44 लाख करोड़** के प्रोजेक्ट्स फंसे

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Real Estate Sector: RERA कानून में बड़े बदलाव की मांग, **₹12.44 लाख करोड़** के प्रोजेक्ट्स फंसे

FPCE (Forum for People’s Collective Efforts) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से RERA कानून में आमूलचूल बदलाव की मांग की है। देश में करीब **₹12.44 लाख करोड़** की राशि अटके हुए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में फंसी है, जिससे घर खरीदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

नियम और कानून का पेंच

FPCE का तर्क है कि मौजूदा RERA कानून में हितों का टकराव (Conflict of Interest) है। वर्तमान में राज्य स्तरीय रियल एस्टेट अथॉरिटीज पर एक साथ दोहरी जिम्मेदारी है—इंडस्ट्री को प्रमोट करना और कंज्यूमर के अधिकारों की रक्षा करना। अक्सर अथॉरिटीज प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन के लक्ष्यों को पूरा करने के चक्कर में डेवलपर्स को ज्यादा तवज्जो देने लगती हैं, जिससे खरीदारों को नुकसान उठाना पड़ता है। अब इस कानून को 'Real Estate Homebuyer Protection Act' के रूप में बदलने की सिफारिश की गई है।

आंकड़ों में समस्या की गंभीरता

यह संकट केवल कुछ परिवारों का नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत के करीब 3.8% जीडीपी के बराबर राशि यानी ₹12.44 लाख करोड़ अटके हुए प्रोजेक्ट्स में फंसी है। इसका असर देश के 27.6 लाख परिवारों पर पड़ा है जो सालों से अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं।

निवेशकों के लिए संकेत

रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश करने वालों के लिए यह एक अहम मोड़ हो सकता है। यदि सरकार इन सिफारिशों को मानती है, तो कंपनियों के लिए रेगुलेटरी कंप्लायंस का खर्च बढ़ सकता है। मजबूत बैलेंस शीट वाली और समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने वाली कंपनियों के लिए यह मार्केट कंसोलिडेशन का मौका होगा, जबकि देरी करने वाले और कर्ज के बोझ तले दबे डेवलपर्स के लिए मुसीबतें और बढ़ सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.