बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ कंपनी की वापसी की तैयारी
Embassy Developments फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में बड़ा धमाका करने की तैयारी में है। कंपनी का लक्ष्य ₹8,000 करोड़ की बिक्री बुकिंग हासिल करना है, जो पिछले साल के मुकाबले 73% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी है। कंपनी अपने 3,000 एकड़ के बड़े लैंड बैंक और 40 मिलियन वर्ग फुट से ज़्यादा के डेवलपमेंट पोर्टफोलियो का इस्तेमाल करेगी। इस प्लान के तहत बेंगलुरु, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन और NCR जैसे बड़े शहरों में लगभग ₹19,500 करोड़ के नए प्रोजेक्ट लॉन्च किए जाएंगे।
मुनाफे पर दबाव और अकाउंटिंग का खेल
हाल के नतीजों में कंपनी ने ₹4,631 करोड़ की प्री-सेल्स दर्ज की हैं, लेकिन बॉटम लाइन पर ₹872.47 करोड़ का नेट लॉस दिख रहा है। इसकी मुख्य वजह अकाउंटिंग के तरीकों में बदलाव (completed-contract method) और मर्जर के बाद इन्वेंट्री वैल्यू का बढ़ना है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि जैसे-जैसे प्रोजेक्ट पूरे होंगे, रेवेन्यू बढ़ेगा और मुनाफा भी बेहतर होगा।
कंस्ट्रक्शन कॉस्ट का बढ़ता बोझ
रियल एस्टेट सेक्टर में कंस्ट्रक्शन कॉस्ट 3-5% तक बढ़ गई है। मजदूरों की कमी, पर्यावरण के सख्त नियम और रॉ मटेरियल की कीमतों में उतार-चढ़ाव इसका कारण हैं। वेस्ट एशिया में भू-राजनीतिक तनाव ने भी सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। Embassy Developments भी इस महंगाई से अछूती नहीं है, लेकिन प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस होने से उन्हें कुछ राहत मिल सकती है।
कानूनी अड़चनें दूर, अब ऑपरेशन पर फोकस
कंपनी के लिए सबसे बड़ी राहत मई 2026 में मिली, जब नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने दिवालियापन की कार्यवाही रद्द कर दी। इससे 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत से बना अनिश्चितता का माहौल खत्म हो गया है। अब कंपनी का पूरा ध्यान ऑपरेशनल परफॉर्मेंस सुधारने, प्री-सेल्स को कैश में बदलने और कर्ज चुकाने पर है।
