Embassy Developments Limited की वित्तीय हालत बेहद गंभीर नजर आ रही है। फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) की तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजों ने कंपनी के बुरे हालात को और उजागर कर दिया है। कंपनी ने इस तिमाही में ₹233.14 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 1000.24% ज्यादा है। यह एक चिंताजनक स्थिति है, क्योंकि कंपनी की नेट सेल्स भी गिरकर ₹212.40 करोड़ पर आ गई है, जो पिछली तिमाही से 56.93% कम है। कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन भी -71.75% पर पहुंच गया है, जबकि एक साल पहले यह पॉजिटिव था।
कंपनी की वित्तीय स्थिति
कंपनी की बैलेंस शीट और कैश फ्लो पर भी गहरा असर दिख रहा है। कंपनी का कहना है कि उसके पास ऑपरेटिंग कैश फ्लो से पर्याप्त डेट कवरेज है, लेकिन इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो सिर्फ 0.3x है, जो काफी चिंताजनक है। मार्च 2025 तक कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) गिरकर -1.80% हो गया है। कंपनी ने मार्च 2025 तक लॉन्ग-टर्म डेट को घटाकर ₹2,515.20 करोड़ कर लिया है, लेकिन करंट लायबिलिटीज में भारी बढ़ोतरी हुई है, जो शॉर्ट-टर्म देनदारियों के बढ़ते दबाव को दर्शाती है। प्रमोटर्स ने अपनी 47.8% होल्डिंग को प्लेज (Pledge) कर दिया है, जिससे कंपनी की फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कानूनी लड़ाई और अनिश्चितता
यह सारी वित्तीय परेशानियां और भी गंभीर हो गई हैं क्योंकि कंपनी एक बड़े कानूनी विवाद में फंसी हुई है। केनरा बैंक (Canara Bank) द्वारा शुरू की गई कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के मामले में यह सब हो रहा है। शुरुआत में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने इस प्रक्रिया को स्वीकार कर लिया था, लेकिन Embassy Developments ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में इसे चुनौती दी। दिसंबर 2025 में NCLAT से मिले स्टे ऑर्डर के कारण NCLT का CIRP स्वीकार करने वाला ऑर्डर फिलहाल लागू नहीं हो पा रहा है।
इस कानूनी उलझन के चलते, शेयर बाजार ने भी कंपनी पर शिकंजा कस दिया है। स्टॉक एक्सचेंजों ने Embassy Developments को एडिशनल सर्विलांस मेजर (ASM) फ्रेमवर्क और 'BE' सेगमेंट में डाल दिया है। ताजा खबर यह है कि NCLAT की सुनवाई को एक बार फिर टाल दिया गया है। पहले यह सुनवाई 19 फरवरी 2026 को होनी थी, लेकिन अब इसे 27 फरवरी 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
जोखिम और आगे की राह
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम लगातार जारी NCLT और NCLAT की कार्यवाही है। यह कार्यवाही कंपनी के गहरे वित्तीय या ऑपरेशनल संकट की ओर इशारा करती है। कानूनी अनिश्चितता के साथ-साथ कंपनी का खराब वित्तीय प्रदर्शन, घटता रेवेन्यू और गिरती प्रॉफिटेबिलिटी निवेशक के लिए चिंता का विषय है। पिछले एक साल में शेयर की कीमत में लगभग 54.78% की भारी गिरावट आई है, जो सेक्टर के अन्य स्टॉक्स के मुकाबले काफी खराब प्रदर्शन है। प्रमोटर्स की तरफ से की गई बड़ी प्लेजिंग भी जोखिम बढ़ाती है।
हालांकि, हाल ही में प्रमोटर्स द्वारा ₹1,160 करोड़ का इनफ्यूजन और प्री-सेल्स ग्रोथ जैसी कुछ सकारात्मक खबरें आई हैं, लेकिन इनका कंपनी की कुल वित्तीय सेहत और CIRP मामले के नतीजे पर क्या असर होगा, यह देखना बाकी है। 27 फरवरी 2026 को होने वाली NCLAT की सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी, जिससे इंसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स के संभावित नतीजे का अंदाजा लग सकेगा।
