Embassy Developments ने अपने नए प्रोजेक्ट 'Embassy Origins' के जरिए बाजार में धूम मचा दी है। लॉन्च के महज एक हफ्ते के भीतर कंपनी ने **₹1,800 करोड़** की प्री-सेल्स दर्ज की है, लेकिन कंपनी के बढ़ते कर्ज और गिरते मुनाफे ने निवेशकों की चिंता भी बढ़ा दी है।
सेल्स की रफ्तार और प्रोजेक्ट की डिटेल
16 सितंबर 2026 को लॉन्च हुए 'Embassy Origins' टाउनशिप प्रोजेक्ट को खरीदारों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। कंपनी ने पहले फेज में ही 477 रेसिडेंशियल यूनिट्स बेच दी हैं, जो कि जारी की गई इन्वेंट्री का लगभग 62% है। यह 85 एकड़ में फैला एक विशाल प्रोजेक्ट है, जिसके तहत 'Embassy Riverine' और 'Embassy South Reserve' जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। कुल मिलाकर, इनमें 217 विला और 855 अपार्टमेंट्स हैं, जिनका कुल सेलएबल एरिया करीब 2.6 मिलियन स्क्वायर फीट है। मैनेजमेंट ने पहले चरण के लिए ₹4,500 करोड़ का रेवेन्यू टारगेट रखा है।
फाइनेंशियल सेहत पर निवेशकों की नजर
बेशक सेल्स के आंकड़े उत्साहित करने वाले हैं, लेकिन जून 2026 की तिमाही के नतीजे कुछ और कहानी बयां करते हैं। कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन फिलहाल नेगेटिव चल रहा है। कंस्ट्रक्शन की बढ़ती लागत और ऑपरेशनल खर्चों के चलते मुनाफे पर दबाव बना हुआ है। फिक्स्ड प्राइस प्रोजेक्ट्स होने के कारण मार्जिन और भी ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
कर्ज का जाल और भविष्य की चुनौतियां
निवेशकों के लिए कंपनी का कर्ज (Debt) सबसे बड़ा सरदर्द बना हुआ है। कंपनी को अपना ब्याज चुकाने और कर्ज को रिफाइनेंस करने के लिए लगातार बेहतर कैश फ्लो की जरूरत है। हालांकि प्री-सेल्स से कैश की स्थिति में कुछ सुधार की उम्मीद है, लेकिन क्या कंपनी इस सेल्स मोमेंटम को मुनाफे में बदल पाएगी? इसके अलावा बेंगलुरु के रियल एस्टेट सेक्टर में रेगुलेटरी अप्रूवल्स में देरी जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि कंपनी अपने एग्जीक्यूशन पाइपलाइन को कैसे संभालती है और अगली तिमाही में वित्तीय स्थिति में क्या सुधार देखने को मिलता है।
