पैसों की हेराफेरी का तरीका
अवधेश कुमार गोयल, रजनीश मित्तल, अतुल गुप्ता और विकास गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद अब रेगुलेटर्स का ध्यान सिर्फ प्रोजेक्ट में देरी से हटकर पैसों की चालाकी पर आ गया है। सरकारी जांचकर्ताओं की फोरेंसिक अकाउंटिंग से पता चलता है कि ₹467 करोड़ की अवैध वसूली को सिर्फ गलत जगह नहीं लगाया गया, बल्कि इसे कई जुड़ी हुई कॉर्पोरेट संस्थाओं के ज़रिए इस तरह घुमाया गया कि गलत तरीके से कमाए गए पैसों का पता न चले। इस तरीके से कंपनी ने कई बड़े रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के निर्माण का काम पूरा न करने के बावजूद बाज़ार में मज़बूत लिक्विडिटी (liquidity) की छवि बनाए रखी।
रेगुलेटरी एक्शन और बाज़ार का नज़रिया
यह कार्रवाई भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ते शक के माहौल के बीच आई है, जहाँ प्रोजेक्ट पूरे न होने के मामले ने गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (Serious Fraud Investigation Office) की निगरानी को और कड़ा कर दिया है। सामान्य लिस्टेड डेवलपर्स के विपरीत, जो पैसों के इस्तेमाल में पारदर्शिता रखते हैं, Earth Infrastructures ने खरीदारों से मिले पैसों का इस्तेमाल पुराने कर्ज़ चुकाने में किया और स्टैंडर्ड एस्क्रो (escrow) सुरक्षा उपायों को दरकिनार कर दिया। इतिहास गवाह है कि इस तरह के एक्शन सेक्टर के लिए एक संकेत होते हैं; ये दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) बाज़ार में काम कर रहे अन्य प्राइवेट डेवलपर्स के लिए लिक्विडिटी ऑडिट (liquidity audit) की शुरुआत कर सकते हैं। अप्रैल में ₹100 करोड़ से ज़्यादा की संपत्ति जब्त करना इस गिरफ्तारी का मुख्य कारण बना, जिससे अधिकारियों को कथित धोखाधड़ी के चरम पर प्रमोटरों की व्यक्तिगत संपत्ति के बारे में पता चला।
कंपनी की अंदरूनी कमज़ोरियां
कंपनी का यह मॉडल कि नए खरीदारों से मिले पैसों से पुराने कर्ज़ चुकाए जाएं, एक अस्थिर ऑपरेटिंग सिस्टम बन गया था। यह मॉडल अक्सर उन रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में देखा जाता है जहाँ प्राइवेट इक्विटी (private equity) का पैसा फंसा होता है, और यह तब ढह जाता है जब प्रोजेक्ट पूरे होने की रफ़्तार एक खास स्तर से नीचे चली जाती है। संस्थागत पूंजी की निगरानी न होने के कारण छोटे निवेशक (retail investors) ज़्यादा असुरक्षित हो गए, क्योंकि कंपनी के पास ऐसी कोई स्वतंत्र बोर्ड गवर्निंग (board governance) नहीं थी जो इस तरह की बड़ी हेराफेरी को रोक सके। इसके अलावा, ज़्यादा लीवरेज (leverage) पर निर्भरता का मतलब था कि बाज़ार में थोड़ी सी भी मंदी कंपनी के मुख्य प्रोजेक्ट्स की असल दिवालियापन को छिपाने की क्षमता को तुरंत सीमित कर देती।
आगे की राह और कानूनी कार्रवाई
स्पेशल PMLA कोर्ट द्वारा 5 दिनों की हिरासत में पूछताछ की अनुमति देने के बाद, अब यह जांच उन सहायक लोगों और शैडो डायरेक्टर्स (shadow directors) तक फैलने की उम्मीद है जिन्होंने संपत्ति की परतें बनाने की प्रक्रिया में मदद की हो। रेगुलेटर्स का रवैया रियल एस्टेट में गलत कामों के प्रति 'शून्य सहिष्णुता' (zero-tolerance) का है, जिससे यह मामला कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (Prevention of Money Laundering Act) के तहत एक अहम मुकदमा साबित हो सकता है। बाज़ार के प्रतिभागियों को कंप्लायंस (compliance) नियमों में और सख्ती की उम्मीद करनी चाहिए, जिससे उन प्राइवेट, अनलिस्टेड डेवलपर्स के लिए पूंजी की लागत बढ़ सकती है जिनके पास बैलेंस शीट की ठोस सेहत का कोई सत्यापन योग्य रिकॉर्ड नहीं है।
