Raheja Developers की **₹1,113 Cr** की संपत्ति जब्त! ED का घर खरीदारों से धोखाधड़ी मामले में बड़ा एक्शन

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Raheja Developers की **₹1,113 Cr** की संपत्ति जब्त! ED का घर खरीदारों से धोखाधड़ी मामले में बड़ा एक्शन
Overview

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रियल एस्टेट फर्म Raheja Developers से जुड़ी **₹1,113 करोड़** से अधिक की संपत्ति को अटैच (जब्त) कर लिया है। यह कार्रवाई घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में की गई है।

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ED की जांच के मुताबिक, कंपनी के CMD नवीन एम. Raheja, उनके परिवार और N A Buildwell व Riyasat Palaces जैसी सहयोगी कंपनियों की संपत्तियों को निशाना बनाया गया है। यह जांच कई आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की FIRs पर आधारित है। आरोप है कि 4,600 से अधिक घर खरीदारों से जुटाए गए फंड का एक बड़ा हिस्सा शेल कंपनियों के जरिए व्यक्तिगत लाभ या गैर-संबंधित निवेशों के लिए डायवर्ट किया गया। हाल ही में 25 अप्रैल को हुई छापेमारी में ₹15.82 करोड़ के बुलियन (सोना-चांदी) और ₹15 लाख की विदेशी मुद्रा भी जब्त की गई थी।

यह कार्रवाई रियल एस्टेट सेक्टर के लिए कड़ी नियामक निगरानी का संकेत देती है। ED ने ₹1,113.81 करोड़ की संपत्ति अटैच की है। यह सेक्टर शहरीकरण और बढ़ती आय के कारण विकास की उम्मीद कर रहा है, लेकिन श्रम लागत बढ़ने और वैश्विक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का भी सामना कर रहा है। Raheja Developers खुद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में कई इनसॉल्वेंसी (दिवालियापन) की कार्यवाही का सामना कर चुकी है। 'कृष्णा हाउसिंग स्कीम' के लिए ₹38.89 करोड़ और 'शिलास' के लिए ₹112.90 करोड़ के डिफॉल्ट के मामले प्रोजेक्ट में एक दशक से अधिक की देरी के कारण सामने आए। यह ED की अन्य डेवलपर्स जैसे Earth Infrastructures Limited के खिलाफ इसी तरह की जांच के बाद हुआ है।

Raheja Developers ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि प्रोजेक्ट में देरी बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर की दिक्कतों और RERA-पर्यवेक्षित ऑडिट के कारण हुई है। हालांकि, सेक्टर के मुख्य रेगुलेटर RERA की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठते रहे हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने आदेशों को लागू करने में अपनी सीमाओं के कारण 'शक्तिहीन बाघ' करार दिया है।

इस स्थिति कांट्रास्ट इंडस्ट्री के प्रमुख खिलाड़ियों जैसे DLF से है, जिसने Q3 FY26 में मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की। Godrej Properties और Prestige Estates Projects ने भी FY26 में रिकॉर्ड बिक्री की। ED की यह आक्रामक कार्रवाई, मौजूदा कानूनी मामलों के साथ मिलकर, संदिग्ध वित्तीय प्रथाओं वाले डेवलपर्स पर नियामक दबाव बढ़ने का संकेत देती है। यह निवेशकों के भरोसे और कैपिटल एक्सेस को प्रभावित कर सकता है, जिससे सभी डेवलपर्स को मजबूत वित्तीय नियंत्रण और समय पर प्रोजेक्ट डिलीवरी प्रदर्शित करने की आवश्यकता होगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.