राहेजा डेवलपर्स पर ED का शिकंजा! होमबॉयर्स से धोखाधड़ी के आरोप में दिल्ली-NCR में 7 ठिकानों पर छापे

REAL-ESTATE
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
राहेजा डेवलपर्स पर ED का शिकंजा! होमबॉयर्स से धोखाधड़ी के आरोप में दिल्ली-NCR में 7 ठिकानों पर छापे
Overview

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने **25 अप्रैल, 2026** को दिल्ली-NCR क्षेत्र में राहेजा डेवलपर्स (Raheja Developers) से जुड़े **सात** ठिकानों पर तलाशी ली है। यह कार्रवाई होमबॉयर्स के साथ कथित धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और 'राहेजा रेवांता' (Raheja Revanta) प्रोजेक्ट में फ्लैट्स की डिलीवरी न करने के आरोपों की जांच का हिस्सा है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 25 अप्रैल, 2026 को दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) इलाके में राहेजा डेवलपर्स (Raheja Developers) से जुड़े करीब सात ठिकानों पर दबिश डाली। यह बड़ी कार्रवाई डेवलपर्स पर होमबॉयर्स के साथ कथित धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और खासकर 'राहेजा रेवांता' (Raheja Revanta) प्रोजेक्ट में वादे के मुताबिक फ्लैट्स की डिलीवरी करने में विफलता जैसे गंभीर आरोपों की जांच के तहत की गई है। यह पहली बार नहीं है, ED ने जून 2025 में भी ऐसी ही छापेमारी की थी।

राहेजा डेवलपर्स के लिए यह मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। अप्रैल 2023 में, हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) ने 'राहेजा रेवांता' में बिक्री और खरीद पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। साथ ही, अनसोल्ड इन्वेंट्री को फ्रीज कर दिया गया था और कथित तौर पर ग्राहकों को परेशान करने व फंड डायवर्जन के आरोपों के चलते एक फोरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया था। इसके अलावा, नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने 'शिलास' (Shilas) प्रोजेक्ट की इन्सॉल्वेंसी की कार्रवाई के बीच राहेजा डेवलपर्स को अपनी संपत्तियों के ट्रांसफर पर रोक लगाने का आदेश दिया है, ताकि लेनदारों और होमबॉयर्स के हितों की रक्षा की जा सके। हरियाणा HRERA ने 'राहेजा अथर्वा' (Raheja Atharva) में निर्माण गुणवत्ता और तय समय-सीमा से देरी को लेकर कंपनी के डायरेक्टर्स को तलब करने का भी आदेश दिया था।

हालांकि, राहेजा डेवलपर्स लगातार इन आरोपों से इनकार कर रहा है। कंपनी का कहना है कि उन्होंने ग्राहकों से लिए गए पैसों से ज्यादा का निवेश अपने प्रोजेक्ट्स में किया है, जिसका सबूत RERA-सुपरवाइज्ड ऑडिट में भी है। कंपनी फंड डायवर्जन के आरोपों को सिरे से खारिज करती है। राहेजा डेवलपर्स के अनुसार, खासकर 61-मंजिला 'राहेजा रेवांता' जैसे प्रोजेक्ट में देरी का मुख्य कारण सरकारी बुनियादी ढांचे जैसे पानी, बिजली और सीवेज की कमी है, भले ही उन्होंने डेवलपमेंट चार्जेज का भुगतान किया हो। उनका तर्क है कि इन सेवाओं के बिना सुरक्षित रूप से पजेशन (Possession) नहीं सौंपा जा सकता। दूसरी ओर, खरीदारों के बयानों के मुताबिक, कई प्रोजेक्ट्स में देरी मूल वादों से लगभग एक दशक से ज्यादा की हो चुकी है और कुछ प्रोजेक्ट्स वित्तीय समस्याओं से भी जूझ रहे हैं।

राहेजा डेवलपर्स लिमिटेड, जो 1990 में शामिल हुई थी, एक पब्लिक अनलिस्टेड कंपनी है। 31 मार्च, 2023 को समाप्त फाइनेंशियल ईयर के लिए, कंपनी ने ₹156 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में -11% के कम्पाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) को दर्शाता है। इसका पेड-अप कैपिटल ₹46.08 करोड़ है। CARE रेटिंग्स ने पहले RDL को 'इश्यूअर नॉन-कॉपरेटिंग' (issuer non-cooperating) के तौर पर वर्गीकृत किया था, क्योंकि कंपनी जानकारी देने और सर्विलांस फीस का भुगतान करने में विफल रही थी, जो पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। अतीत में कंपनी पर टैक्स चोरी के आरोप, स्टिंग ऑपरेशन में कथित तौर पर अघोषित फंड स्वीकार करने और प्रोजेक्ट की अनियमितताओं को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जांच जैसे विवाद भी जुड़े रहे हैं।

वहीं, दूसरी तरफ DLF और Lodha Developers जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों ने मजबूत फाइनेंशियल नतीजे पेश किए हैं। DLF का P/E रेशियो अप्रैल 2026 तक करीब 30.5-52.82x रहा, जिसके चलते कुछ एनालिस्ट्स इसे अंडरवैल्यूड मानते हैं। मार्केट लीडर Lodha Developers ने Q4 FY26 में ₹1,007.90 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया और कम लीवरेज के साथ प्रॉफिटेबल ग्रोथ पर ध्यान केंद्रित किया। Godrej Properties ने भी मजबूत रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ दिखाई है।

दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) रियल एस्टेट मार्केट में पिछले पांच सालों में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज की कीमतों में काफी उछाल देखा गया है। 2026 की शुरुआत तक, मार्केट में स्थिरता के संकेत मिल रहे थे, जहां आय वृद्धि प्रॉपर्टी की कीमतों में वृद्धि के साथ तालमेल बिठा रही थी और एंड-यूजर डिमांड की ओर झुकाव बढ़ा था। हालांकि, चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। कुछ रिपोर्ट्स बढ़ती कीमतों और घटती बिक्री के बीच एक बड़े अंतर की ओर इशारा करती हैं, जो संभवतः बढ़े हुए निर्माण लागत और डेवलपर्स की सतर्कता से उत्पन्न मुद्दों को छिपा सकती है। RERA जैसे रेगुलेटरी सुधारों का मकसद खरीदारों की सुरक्षा और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है, लेकिन प्रोजेक्ट में देरी और फंड डायवर्जन के आरोप डेवलपर्स की विश्वसनीयता को अभी भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। हाल ही में गुरुग्राम (Gurugram) ट्रांजैक्शन में PAN डिस्क्लोजर के गायब होने को लेकर जांच ने इस सेक्टर में वित्तीय अनुपालन पर रेगुलेटरी फोकस को और तेज कर दिया है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.