द्वारका एक्सप्रेस-वे, करीब **9,000 करोड़** की लागत से बनी **29 किलोमीटर** लंबी सड़क, प्रॉपर्टी की कीमतों को **18,000 रुपये प्रति वर्ग फुट** तक ले गई है। लेकिन, इस प्रोजेक्ट के हाई टोल रेट्स को लेकर अब स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा है।
क्या हुआ है?
द्वारका एक्सप्रेस-वे, जो दिल्ली और गुरुग्राम के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए बनाया गया है, रियल एस्टेट के लिए एक बड़ा बूस्टर साबित हुआ है। 2022 में जहां यहां प्रॉपर्टी की औसत कीमत 8,000 रुपये प्रति वर्ग फुट थी, वहीं अब यह 18,000 रुपये प्रति वर्ग फुट के करीब पहुंच गई है। साल 2025 के मध्य तक दिल्ली सेक्शन के खुलने के साथ ही यह एक्सप्रेस-वे पूरी तरह से चालू हो गया है।
रियल एस्टेट में ग्रोथ और निवेशकों पर असर
यह प्रोजेक्ट रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए बड़ा गेम चेंजर साबित हुआ है। DLF, Godrej Properties, Sobha, और M3M जैसी बड़ी कंपनियों को इसका सीधा फायदा हो रहा है। एक्सप्रेस-वे से इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अर्बन एक्सटेंशन रोड (UER) से कनेक्टिविटी आसान हो गई है, जिससे घरों की डिमांड बढ़ी है।
हालांकि, कीमतों में इतनी तेजी से उछाल से खरीदारों की जेब पर भारी पड़ सकता है, और भविष्य में बिक्री धीमी होने का खतरा भी है। ऐसे में, निवेशक प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी और गुरुग्राम के कॉर्पोरेट हब से रेंटल डिमांड के बीच संतुलन बनाने की उम्मीद कर रहे हैं।
टोल को लेकर विवाद
एक्सप्रेस-वे के फायदे के बावजूद, टोल रेट्स बड़ा मुद्दा बन गए हैं। प्राइवेट कार से एक बार जाने का टोल 225 रुपये है, वहीं वापसी का 340 रुपये। रोज़ आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह खर्च बहुत ज्यादा है, जिसके विरोध में स्थानीय रेजिडेंट्स एसोसिएशन सड़क पर उतर आए हैं।
यात्री संगठन नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से टोल में छूट की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि स्कूल बसों, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए दरें कम की जाएं और लोकल पास के लिए बेहतर ऑप्शन दिए जाएं। यह मामला प्रोजेक्ट के रेवेन्यू पर भी असर डाल सकता है, अगर सरकार पर रेट्स बदलने का दबाव बनता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और डेवलपर्स का नजरिया
व्यापक बिजनेस के नजरिए से, द्वारका एक्सप्रेस-वे नेशनल हाईवे नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण विस्तार है। रियल एस्टेट के लिए, ऐसे प्रोजेक्ट्स लैंड डेवलपमेंट से निकलकर हाई-डेंसिटी, मिक्स्ड-यूज़ कमर्शियल और रिटेल हब बनने का रास्ता खोलते हैं।
हालांकि, इन डेवलपमेंट्स की सफलता सिर्फ सड़क पर निर्भर नहीं करती। स्कूलों, अस्पतालों और शॉपिंग सेंटर्स जैसी सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास भी जरूरी है। अगर ये चीज़ें हाउसिंग यूनिट्स के साथ तालमेल बिठाकर विकसित नहीं हुईं, तो रेजिडेंशियल ऑक्यूपेंसी रेट उम्मीद से कम रह सकती है, जो प्रॉपर्टी की कीमतों पर दबाव डाल सकती है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
रियल एस्टेट या इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में दिलचस्पी रखने वाले निवेशकों को कुछ चीज़ों पर नजर रखनी चाहिए। पहला, NHAI की ओर से टोल रेट्स या लोकल यूजर्स के लिए कंसेशन पर किसी भी अपडेट पर ध्यान दें। दूसरा, इस कॉरिडोर पर डेवलपर्स की बिक्री (sales velocity) और इन्वेंटरी लेवल को ट्रैक करें; ऊंची कीमतें अच्छी हैं, लेकिन वैल्यूएशन को बनाए रखने के लिए लगातार बिक्री जरूरी है। आखिर में, कमर्शियल डेवलपमेंट की गति पर नजर रखें, क्योंकि यह नेशनल कैपिटल रीजन में रियल एस्टेट के लॉन्ग-टर्म वैल्यू का असली ड्राइवर है।
