Dev Accelerator: निवेशकों की चांदी! 53% रेवेन्यू ग्रोथ और ₹120 Cr का महा-डील

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AuthorMehul Desai|Published at:
Dev Accelerator: निवेशकों की चांदी! 53% रेवेन्यू ग्रोथ और ₹120 Cr का महा-डील
Overview

Dev Accelerator Limited ने धमाकेदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू **53%** बढ़कर **₹166.7 करोड़** हो गया है, और उन्हें अहमदाबाद में **₹120 करोड़** सालाना का अब तक का सबसे बड़ा ऑफिस कॉन्ट्रैक्ट मिला है।

नतीजों का गणित (The Financial Deep Dive)

कंपनी के नतीजों पर नजर डालें तो, Q3 FY26 में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 19% बढ़कर ₹59.2 करोड़ रहा। वहीं, 9 महीनों (9MFY26) में यह 53% की जबरदस्त ग्रोथ के साथ ₹166.7 करोड़ पर पहुंच गया। स्टैंडअलोन आधार पर, 9MFY26 में ऑपरेशन्स से रेवेन्यू 49.6% बढ़कर ₹123.96 करोड़ रहा। कंपनी का स्टैंडअलोन EBITDA मार्जिन 61.1% के मजबूत स्तर पर बना हुआ है। Q3 FY26 में कैश ईबीआईटी (Cash EBIT) में 572% और पीबीटी (PBT) में 773% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पीबीटी में कुछ 'विशेष आय' (exceptional income) भी शामिल है, जिसके सटीक आंकड़े नहीं दिए गए हैं। फिलहाल, कंपनी की ओर से नेट प्रॉफिट (PAT) और ईपीएस (EPS) के आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं।

अहमदाबाद में ₹120 करोड़ का महा-कॉन्ट्रैक्ट

इस तिमाही की सबसे बड़ी खबर अहमदाबाद से आई है। Dev Accelerator ने भारत का अब तक का सबसे बड़ा सिंगल मैनेज्ड ऑफिस कॉन्ट्रैक्ट अपने नाम किया है। यह 8 लाख वर्ग फुट का स्पेस होगा, जिसके लिए कंपनी ₹100 करोड़ का निवेश 4 साल में करेगी और इससे सालाना ₹120 करोड़ का रेवेन्यू आने का अनुमान है। इससे करीब 8,500 सीटें तैयार होंगी।

ऑपरेशनल मजबूती और एसेट-लाइट मॉडल

कंपनी अब 12 शहरों में 28 सेंटर्स का संचालन कर रही है, जिसमें कुल 0.83 मिलियन वर्ग फुट एरिया शामिल है और ऑक्यूपेंसी रेट 88.4% है। इनका अहमदाबाद मेगा कैंपस भी अब चालू हो गया है, जिसने 95% प्री-लीजिंग हासिल की है और इससे हर महीने करीब ₹2.75 करोड़ का रेवेन्यू मिल रहा है। कंपनी का 'एसेट-लाइट डेवलपमेंट मैनेजमेंट मॉडल' और टियर-2 शहरों पर फोकस इस ग्रोथ का मुख्य कारण बताया जा रहा है।

आगे की राह और रिस्क फैक्टर्स

निवेशकों के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है। PAT और EPS के आंकड़े न होने से बॉटम-लाइन प्रॉफिटेबिलिटी का सीधा आकलन मुश्किल है। साथ ही, ऊंचे EBITDA मार्जिन की निरंतरता और बड़े अहमदाबाद कॉन्ट्रैक्ट के एग्जीक्यूशन पर नजर रखनी होगी। कंपनी का 75% रेवेन्यू टियर-2 शहरों से आता है, जो इन बाजारों में किसी भी मंदी के प्रति संवेदनशील हो सकता है। आगे चलकर, निवेशकों को नए अहमदाबाद कॉन्ट्रैक्ट से रेवेन्यू की वसूली और मेगा कैंपस के प्रदर्शन पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। साथ ही, कंपनी का अपने एसेट-लाइट मॉडल को टियर-2 और संभवतः टियर-1 शहरों में विस्तार करने की क्षमता इसकी भविष्य की ग्रोथ के लिए अहम होगी।

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