दिल्ली सरकार कृषि भूमि (Agricultural Land) के सर्कल रेट में बड़ा बदलाव करने जा रही है, जिसके तहत प्रीमियम इलाकों में रेट **₹5 करोड़** प्रति एकड़ तक पहुँच सकते हैं। यह कदम **2008** से चली आ रही पुरानी दरों को खत्म कर उन्हें मौजूदा बाजार भाव के करीब लाने के लिए उठाया जा रहा है।
दिल्ली सरकार कृषि भूमि की कीमतों के ढांचे को आधुनिक बनाने की तैयारी में है। पिछले दो दशकों से ये दरें सामान्य जमीन के लिए ₹53 लाख और फ्लडप्लेन क्षेत्रों के लिए ₹17.6 लाख प्रति एकड़ पर रुकी हुई थीं। अब सरकार इसे बाजार की हकीकत से जोड़ने के लिए साउथ और नई दिल्ली जैसे प्रीमियम क्षेत्रों में दरें ₹5 करोड़ प्रति एकड़ तक ले जाने का प्रस्ताव रख रही है।
यह बदलाव 'मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2047' का अहम हिस्सा है। नई व्यवस्था के तहत, साउथ-वेस्ट जिले में रेट ₹3.5 करोड़ प्रति एकड़, जबकि नॉर्थ, वेस्ट और नॉर्थ-वेस्ट जिलों में रेट ₹3 करोड़ प्रति एकड़ तय होने की संभावना है।
डेवलपर्स और जमीन मालिकों पर असर
वर्तमान में छतरपुर जैसे इलाकों में कृषि भूमि ₹10 करोड़ से ₹18 करोड़ प्रति एकड़ तक बिकती है, जबकि आधिकारिक सर्कल रेट काफी कम हैं। सर्कल रेट बढ़ने से स्टैम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क में सीधा इजाफा होगा। रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए जमीन अधिग्रहण की लागत बढ़ेगी, जिसका असर उनके प्रोजेक्ट मार्जिन पर पड़ सकता है। साथ ही, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन का अधिग्रहण अब सरकार और निजी कंपनियों के लिए पहले से अधिक महंगा साबित होगा।
आगे क्या होगा?
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ मिलकर स्थानीय प्रशासन इस पर काम कर रहा है। अक्टूबर से शुरू हुई पब्लिक कंसल्टेशन प्रक्रिया के बाद अब सभी की नजरें फाइनल गजट नोटिफिकेशन पर टिकी हैं। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो शहर के ग्रीन बेल्ट में नए रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के लिए डेवलपर्स को अपना बिजनेस मॉडल बदलना पड़ सकता है।
