दिल्ली में असुरक्षित PG के खिलाफ चलाए जा रहे एमसीडी (MCD) के सख्त अभियान से किराए में भारी उछाल का डर पैदा हो गया है। 1,200 से अधिक प्रॉपर्टीज की जांच के बाद कई अवैध इकाइयों को बंद किया गया है, जिससे छात्रों के लिए कमरों का संकट गहराता जा रहा है।
सख्त कार्रवाई का असर
सत्य निकेतन में हाल ही में हुए दर्दनाक हादसे के बाद, म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) ने शहर भर में पीजी (PG) आवासों के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य संरचनात्मक और अग्निशमन सुरक्षा मानकों को लागू करना है। 10 सितंबर 2026 तक, अधिकारियों ने 1,252 संपत्तियों का सर्वे किया है, जिसके बाद कई असुरक्षित इमारतों को सील या ध्वस्त कर दिया गया है।
छात्रों के हब में बढ़ा संकट
यह कार्रवाई सीधे तौर पर सत्य निकेतन, राजिंदर नगर और मुखर्जी नगर जैसे इलाकों को प्रभावित कर रही है, जो छात्रों के मुख्य केंद्र माने जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली यूनिवर्सिटी में 2.5 लाख से अधिक छात्र हैं, जबकि यूनिवर्सिटी के पास खुद के केवल 9,000 से कम हॉस्टल बेड उपलब्ध हैं। इस भारी अंतर के कारण छात्र पूरी तरह से प्राइवेट सेक्टर पर निर्भर हैं।
क्यों बढ़ सकता है किराया?
रियल एस्टेट एनालिस्ट्स का मानना है कि यदि प्रशासन बिना किसी नई सुरक्षित सप्लाई के पुरानी इकाइयों को बंद करता रहा, तो कमरों के लिए गलाकाट प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी। इससे दिल्ली में पीजी का किराया 10% तक और बढ़ सकता है।
भविष्य की रूपरेखा
अब मकान मालिकों के लिए सुरक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य हो गया है। इसके अलावा, दिल्ली सरकार 'पेइंग गेस्ट एकोमोडेशन रेगुलेशन एंड वेलफेयर बिल' लाने की तैयारी कर रही है। इस नए कानून के तहत लाइसेंसिंग, सेफ्टी सर्टिफिकेशन और रेंट कैपिंग (किराए पर सीमा) जैसे कड़े नियम लागू किए जा सकते हैं, जो इस अनौपचारिक सेक्टर को पूरी तरह बदल देंगे।
