दिल्ली-एनसीआर में रिटेल लीजिंग का धमाल
2026 की पहली तिमाही में दिल्ली-एनसीआर के रिटेल रियल एस्टेट मार्केट ने कमाल का प्रदर्शन किया है। लीजिंग एक्टिविटी में पिछले साल इसी अवधि के मुकाबले 45% की जोरदार बढ़ोतरी हुई है। कुल मिलाकर 0.59 मिलियन वर्ग फुट जगह लीज़ पर दी गई, जो कि पिछले साल की 0.41 मिलियन वर्ग फुट की तुलना में काफी ज़्यादा है। इस तेजी में शॉपिंग मॉल्स का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिन्होंने कुल लीजिंग वॉल्यूम का 64% हिस्सा हासिल किया, जबकि हाई स्ट्रीट की हिस्सेदारी 36% रही। इस शानदार प्रदर्शन ने दिल्ली-एनसीआर को भारत के 8 बड़े शहरों में टॉप पर ला खड़ा किया है, जो कुल लीजिंग का 30% हिस्सा समेटे हुए है।
राष्ट्रीय बाजार में सुस्ती, सप्लाई की किल्लत
इसके विपरीत, पूरे भारत के रिटेल रियल एस्टेट मार्केट में सुस्ती छाई रही। 8 बड़े शहरों में कुल लीजिंग 10% घटकर 1.95 मिलियन वर्ग फुट रह गई, जो पिछले साल 2.17 मिलियन वर्ग फुट थी। इस गिरावट की मुख्य वजह नई सप्लाई की कमी रही, क्योंकि इस तिमाही में कोई नया मॉल बनकर तैयार नहीं हुआ। इस राष्ट्रीय मंदी के बावजूद, खरीदारों की मांग मज़बूत बनी हुई है, जो 2025 के मजबूत आंकड़ों के बाद आई है।
दिल्ली-एनसीआर अव्वल, मॉल्स की मांग बढ़ी
दिल्ली-एनसीआर की अग्रणी भूमिका अन्य शहरों की तुलना में और भी साफ दिखती है। इसने कुल लीजिंग का 30% हिस्सा लिया, जिसके बाद हैदराबाद (22%) और मुंबई (13%) का नंबर आता है। इन तीनों शहरों ने मिलकर Q1 2026 की कुल लीजिंग का 65% हिस्सा कवर किया। पूरे देश में, शॉपिंग मॉल्स ने कुल लीजिंग में अपनी हिस्सेदारी पिछले साल के 33% से बढ़ाकर 47% कर ली है, जो ऑर्गनाइज़्ड रिटेल स्पेस के प्रति बढ़ती प्राथमिकता को दिखाता है। हालाँकि, हाई स्ट्रीट अभी भी कुल लीजिंग वॉल्यूम का 53% है। फैशन और फ़ूड एंड बेवरेज सेक्टर मुख्य डिमांड ड्राइवर रहे, जिन्होंने 46% लीजिंग में योगदान दिया, और एंटरटेनमेंट सेक्टर में भी ग्रोथ देखने को मिली। घरेलू रिटेलर्स ने 87% लीजिंग में मुख्य भूमिका निभाई, हालाँकि इंटरनेशनल ब्रांड्स भी, खासकर मॉल्स में, अपने विस्तार की योजना बना रहे हैं।
कम वेकेंसी और ब्याज दरों का असर
प्राइम रिटेल लोकेशन में वेकेंसी रेट्स (खालीपन दर) काफी कम है। ग्रेड ए मॉल्स में यह 5.7% और ग्रेड ए+ एसेट्स में मात्र 2.6% है, जो सप्लाई और डिमांड के बीच लगातार असंतुलन को दर्शाता है। फिलहाल, डिमांड उपलब्ध क्वालिटी स्पेस से ज़्यादा है। लेकिन, आने वाले समय में संभावित ब्याज दरों में बढ़ोतरी रेंटल ग्रोथ (किराये की वृद्धि) को प्रभावित कर सकती है। विश्लेषकों का अनुमान है कि महंगाई की चिंता और वैश्विक तनावों के चलते 2026 में रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अपनी पॉलिसी रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। ऐसा कदम रियल एस्टेट जैसे ब्याज-संवेदनशील क्षेत्रों में डिमांड को धीमा कर सकता है, जो मौजूदा मज़बूत लीजिंग के बावजूद डेवलपर्स और रिटेलर्स के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
नई सप्लाई से मिलेगी राहत
भविष्य की ओर देखें तो, 2026 में बाज़ार में लगभग 5.88 मिलियन वर्ग फुट नई रिटेल स्पेस आने की उम्मीद है, और 2028 तक 14.94 मिलियन वर्ग फुट की एक बड़ी पाइपलाइन तैयार है। यह अपेक्षित नई सप्लाई मौजूदा कमी को दूर करने में मदद करेगी। क्वालिटी स्पेस, खासकर ग्रेड ए+ एसेट्स के आने से लीजिंग मोमेंटम बना रहने की उम्मीद है और यह रिटेल रियल एस्टेट सेक्टर को और अधिक प्रोफेशनल बनाने में योगदान देगा। हालाँकि, वर्तमान स्थिति जहाँ डिमांड उपलब्धता से ज़्यादा है, जारी रहने की संभावना है। इसके लिए डेवलपर्स को ऐसे स्पेसेस बनाने होंगे जो उपभोक्ताओं की बदलती चाहतों, खासकर एंगेजिंग रिटेल अनुभवों को पूरा कर सकें।